असम की राजधानी गुवाहाटी में गुरुवार को “सेवा से समृद्धि: पंचायत-नेतृत्व वाली सेवा वितरण” विषय पर क्षेत्रीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, असम सरकार के मंत्री रामेश्वर तेली और अन्य गणमान्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर किया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को तकनीक, डिजिटल नवाचार और नागरिक-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना है। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों के पंचायत प्रतिनिधि, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) संचालक, प्रशासनिक अधिकारी और ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए।
“सशक्त ग्राम ही विकसित भारत की नींव” : एस. पी. सिंह बघेल
केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी पूरा होगा, जब गांव आत्मनिर्भर और सशक्त बनेंगे। उन्होंने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने का सबसे मजबूत माध्यम हैं।
उन्होंने “सरकार आपके द्वार” पहल को मजबूत बनाने में CSC-SPV की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म और पंचायती राज संस्थाओं के बेहतर समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा वितरण को और प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए रिकॉर्ड की शुद्धता, CSC संचालकों का प्रशिक्षण और तकनीक आधारित पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
पंचायतों को ग्रामीण विकास की सबसे मजबूत कड़ी बताया
असम सरकार में परिवर्तन एवं विकास, श्रम कल्याण तथा चाय जनजाति एवं आदिवासी कल्याण मंत्री रामेश्वर तेली ने कहा कि पंचायतें गांवों के सामाजिक और आर्थिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सेवा भावना और जनभागीदारी के साथ काम करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत में बदलाव लाने के लिए पंचायतों को तकनीक और नवाचार से जोड़ना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
डिजिटल सेवा वितरण पर विशेष जोर
असम सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बल्लेपु कल्याण चक्रवर्ती ने कहा कि “सेवा से समृद्धि” की अवधारणा वर्तमान समय में बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि डिजिटल सेवाओं और कॉमन सर्विस सेंटर के जरिए ग्रामीण नागरिकों तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच को आसान और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर ने अपने संबोधन में कहा कि पंचायतें जमीनी स्तर पर सुशासन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने डिजिटल सशक्तिकरण, सहभागी विकास और समयबद्ध सेवा वितरण को आत्मनिर्भर गांवों की आधारशिला बताया।
उत्कृष्ट सेवा देने वाली पंचायतों और VLEs को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न राज्यों के उत्कृष्ट कार्य करने वाले ग्राम पंचायतों और CSC संचालकों को सम्मानित भी किया गया।
सम्मान पाने वालों में शामिल हैं:
- राजस्थान की वीएलई सूरता देवी सैनी
- पंजाब के वीएलई अमनदीप सिंह
- असम की वीएलई गिरिजा नाथ
- ओडिशा की वीएलई सुमित्रा दास
- तेलंगाना के यदाद्रीभुवनगिरि जिले की शिवारेड्डीगुडेम ग्राम पंचायत
- ओडिशा के केंदुझार जिले की सुआकाती ग्राम पंचायत
इन सभी को ग्रामीण क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा वितरण और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने के लिए सम्मानित किया गया।
पंचायत आधारित डिजिटल गवर्नेंस पर फोकस
कार्यशाला में डिजिटल परिवर्तन, बहुभाषी शासन, नागरिक भागीदारी और तकनीक आधारित सेवा वितरण जैसे विषयों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि पंचायतों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाकर ग्रामीण भारत में सरकारी योजनाओं की पहुंच और पारदर्शिता को बढ़ाया जा सकता है।
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यह कार्यशाला ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।









