भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के अधिकारी समीर वानखेड़े एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके द्वारा दायर की गई मानहानि याचिका को लेकर है, जो उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान और गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स और वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ के निर्माताओं के खिलाफ दाखिल की है।
हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस
सोमवार, 8 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट में इस याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने नेटफ्लिक्स और रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट को नोटिस जारी करते हुए उनसे इस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है। अगली सुनवाई इसी महीने के अंत में होगी।
वानखेड़े ने आरोप लगाया है कि वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में उन्हें नकारात्मक तरीके से चित्रित किया गया है, जिससे उनकी और उनके परिवार की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
“छवि को पहुंची गंभीर क्षति”
समीर वानखेड़े के वकील के अनुसार, “इस सीरीज में जो कंटेंट दिखाया गया है वह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक है। इससे समीर वानखेड़े की पेशेवर छवि, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सामाजिक सम्मान को गंभीर नुकसान पहुंचा है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सीरीज वानखेड़े के अतीत में ड्रग्स केस से जुड़ी घटनाओं को आधार बनाकर बनाई गई है, जिसमें उनके कैरेक्टर को जानबूझकर नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
आर्यन खान का डायरेक्शन डेब्यू
खास बात यह है कि इस विवादित वेब सीरीज का निर्देशन खुद आर्यन खान, यानी शाहरुख खान के बेटे ने किया है। ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ आर्यन का डायरेक्शन डेब्यू है और इसे शाहरुख-गौरी खान की कंपनी रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है।
वानखेड़े की प्रतिक्रिया – “सत्यमेव जयते”
इस पूरे विवाद पर IRS अधिकारी समीर वानखेड़े ने मीडिया से सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया केवल दो शब्दों में दी – “सत्यमेव जयते”।इस छोटे से बयान में वानखेड़े का आत्मविश्वास और न्याय में विश्वास झलकता है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि समीर वानखेड़े, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारी रह चुके हैं और उन्होंने 2021 में आर्यन खान के खिलाफ ड्रग्स केस में कार्रवाई की थी। उस समय यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था। अब उसी संदर्भ को लेकर बनाई गई वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में वानखेड़े के किरदार को कथित तौर पर गलत रूप में दिखाया गया है।
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यह मामला न केवल एक अधिकारी की प्रतिष्ठा से जुड़ा है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि रचनात्मक स्वतंत्रता की आड़ में क्या किसी की छवि को नुकसान पहुंचाना उचित है? अब इस केस पर अगली सुनवाई महीने के अंत में होनी है, जिसके बाद कोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।








