मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर नई स्थिति सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, बल्कि केवल उन देशों के जहाजों के लिए खुला है जिन्हें वह अपना सहयोगी मानता है।
‘दोस्त देशों’ को राहत, बाकी के लिए पाबंदी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों के जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि जिन देशों को ईरान विरोधी मानता है या उनके सहयोगी हैं, उनके लिए रास्ता बंद रहेगा।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब क्षेत्र में सैन्य और राजनीतिक तनाव चरम पर है और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
संयुक्त राष्ट्र ने जताई गहरी चिंता
इस स्थिति पर UNO के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज में बाधा से वैश्विक स्तर पर तेल, गैस और खाद की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
गुटेरेस ने कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में रुकावट का असर सीधे कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, खासकर उस समय जब कई देशों में खेती का महत्वपूर्ण सीजन चल रहा है।
अमेरिका और इजरायल को सख्त संदेश
महासचिव ने संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल से अपील की कि वे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में कदम उठाएं। साथ ही ईरान से भी कहा गया कि वह उन पड़ोसी देशों को निशाना बनाना बंद करे, जो इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं हैं।
शांति प्रस्ताव ठुकराया, बातचीत जारी
तनाव कम करने के लिए अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान ने खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि युद्ध का अंत उसकी शर्तों पर ही होगा।
वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि ईरानी नेतृत्व के साथ बातचीत जारी है और समझौते की संभावना बनी हुई है।
होर्मुज से गुजरने के लिए नई शर्तें
ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब किसी भी गैर-विरोधी देश के जहाज को भी इस मार्ग से गुजरने से पहले ईरानी अधिकारियों से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन ने कहा कि जो देश संघर्ष में शामिल नहीं हैं, वे सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करके सुरक्षित आवाजाही कर सकते हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर संभव
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस व्यापार का रास्ता यही जलडमरूमध्य है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक बाजार, ईंधन कीमतों और सप्लाई चेन पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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कुल मिलाकर, होर्मुज को लेकर बनी यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।









