कांग्रेस नेता राहुल गांधी को सोमवार को बड़ी राहत मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर फिलहाल रोक लगा दी। कोर्ट ने मामले को खारिज करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मामला दिसंबर 2022 का है, जब ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान राहुल गांधी ने चीन के साथ सीमा विवाद पर बयान दिया था कि “भारतीय सैनिक चीनी सैनिकों के हाथों पिट रहे हैं।” इस बयान को लेकर लखनऊ निवासी उदय शंकर श्रीवास्तव ने मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया कि यह बयान न केवल भारतीय सेना का अपमान है, बल्कि देश की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 29 मई 2025 को राहुल गांधी की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह शिकायत राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और उनका बयान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है।
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ, जिसमें जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह शामिल हैं, ने सुनवाई के दौरान राहुल गांधी से तीखे सवाल किए। कोर्ट ने कहा, “आप विपक्ष के नेता हैं। अगर आपको कोई सवाल उठाना था तो संसद में उठाते, सोशल मीडिया पर लिखने की क्या आवश्यकता थी?”

कोर्ट ने आगे कहा, “सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलते समय ज़िम्मेदारी ज़रूरी है। अगर आपके पास फ्रीडम ऑफ स्पीच का अधिकार है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी कह सकते हैं। क्या आपकी टिप्पणी किसी विश्वसनीय और आधिकारिक जानकारी पर आधारित थी?”
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने ना सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ज़िम्मेदारियों पर बहस को हवा दी है, बल्कि राजनीतिक नेताओं की सार्वजनिक टिप्पणियों की सीमा और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
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फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई है और अगली सुनवाई में यूपी सरकार और शिकायतकर्ता को जवाब देने को कहा है। अब देखना होगा कि कोर्ट इस याचिका को किस दिशा में ले जाती है और राहुल गांधी को इस मामले में आगे राहत मिलती है या नहीं।









