तमिलनाडु की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK ने पहली ही बार चुनाव लड़ते हुए 108 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया है। हालांकि, यह सफलता अभी अधूरी है क्योंकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें पीछे रह गई है।
बहुमत से दूर, समर्थन की तलाश
234 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है, जबकि TVK के पास फिलहाल 108 विधायक हैं। ऐसे में उसे कम से कम 10-12 अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है। इसके अलावा, विजय के दो सीटों से जीतने के कारण एक सीट छोड़नी होगी और स्पीकर के चयन के बाद प्रभावी संख्या और कम हो सकती है।
सरकार बनाने के तीन प्रमुख विकल्प
पहला विकल्प: DMK गठबंधन के छोटे दलों का साथ
TVK, DMK गठबंधन के छोटे दलों को साथ लेकर सरकार बना सकती है। इसमें कांग्रेस(5), वाम दल(4), IUML(2) और VCK(2) जैसे दल शामिल हो सकते हैं। यह विकल्प TVK को जरूरी बहुमत तक पहुंचा सकता है।
दूसरा विकल्प: दोनों गठबंधनों के छोटे दलों का समर्थन
TVK, DMK और AIADMK दोनों खेमों के छोटे दलों को साथ लेकर भी सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस(5), पीएमके(4), वाम दल(4) और अन्य क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लाया जा सकता है।
तीसरा विकल्प: AIADMK के साथ सीधा गठबंधन
सबसे मजबूत विकल्प TVK और AIADMK के बीच गठबंधन माना जा रहा है। AIADMK की 47 सीटों के साथ TVK आराम से बहुमत के आंकड़े को पार कर सकती है और स्थिर सरकार बना सकती है।
किंगमेकर बने छोटे दल
इस चुनाव में छोटे दलों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। कांग्रेस, वाम दल, IUML और VCK जैसे दल अब सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यही वजह है कि TVK सभी संभावित सहयोगियों से बातचीत कर रही है और उन्हें सरकार में भागीदारी देने पर विचार कर रही है।
राज्यपाल की अगली भूमिका अहम
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर जल्द ही सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। वे TVK को बहुमत साबित करने का मौका दे सकते हैं। यदि पार्टी बहुमत जुटाने में असफल रहती है, तो दूसरे दल को आमंत्रित किया जा सकता है या फिर राज्य में राष्ट्रपति शासन की स्थिति भी बन सकती है।
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तमिलनाडु में इस बार का जनादेश साफ तौर पर बदलाव का संकेत देता है, लेकिन सरकार गठन की राह अभी भी जटिल बनी हुई है। आने वाले दिनों में गठबंधन की राजनीति ही तय करेगी कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाएगी।









