पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने इस बार राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर कर दिया है। सबसे चर्चित मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के बीच रहा, जिसमें अधिकारी ने एक बार फिर बाजी मार ली।
भवानीपुर सीट पर बड़ा झटका
भवानीपुर विधानसभा सीट, जिसे लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, इस चुनाव में भाजपा के खाते में चली गई। सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों के अंतर से हराया।
अधिकारी को कुल 73,917 वोट मिले, जबकि ममता बनर्जी को 58,812 वोटों से संतोष करना पड़ा। यह हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह वही सीट थी जहां से ममता बनर्जी ने कई बार जीत दर्ज की थी।
नंदीग्राम में भी अधिकारी की बढ़त
पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम सीट से भी सुवेंदु अधिकारी ने मजबूत प्रदर्शन किया। यहां उन्होंने तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार को 9,665 वोटों से हराया। इस सीट पर अधिकारी को 1,27,301 वोट मिले, जो उनके क्षेत्रीय प्रभाव को दर्शाता है।
राजनीतिक समीकरणों में बदलाव
यह परिणाम कई मायनों में खास है। कभी ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी रहे सुवेंदु अधिकारी का भाजपा में शामिल होना और फिर उन्हीं को चुनावी मैदान में हराना, राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर को दिखाता है। लगातार दो चुनावों में ममता बनर्जी को उनके हाथों हार का सामना करना पड़ा है।
भवानीपुर का बदला इतिहास
भवानीपुर सीट का राजनीतिक इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। शुरुआती वर्षों में यहां कांग्रेस का प्रभाव रहा, फिर वाम दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2011 के बाद यह सीट तृणमूल कांग्रेस के कब्जे में रही, लेकिन इस बार के नतीजों ने इस परंपरा को तोड़ दिया है।
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पश्चिम बंगाल के इन चुनाव परिणामों ने साफ कर दिया है कि राज्य की राजनीति में अब नए समीकरण बन रहे हैं। भाजपा का बढ़ता प्रभाव और तृणमूल कांग्रेस को मिला यह झटका आने वाले समय में और बड़े बदलावों की ओर इशारा कर सकता है।









