लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के संस्थापक और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे देश ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी उन्हें याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा: “वंचितों के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले श्रद्धेय रामविलास पासवान जी को उनकी पुण्यतिथि पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
रामविलास पासवान: वंचितों की आवाज
रामविलास पासवान भारतीय राजनीति में दलित समुदाय और पिछड़े वर्गों की मजबूत आवाज के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने कई दशकों तक केंद्र और राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाई और समाज के वंचित तबकों को मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर संघर्ष किया।
बिहार चुनाव में बढ़ी सरगर्मी, गठबंधनों में खींचतान
इस बीच, बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। चुनाव दो चरणों में कराए जाएंगे —
- पहला चरण: 6 नवंबर
- दूसरा चरण: 11 नवंबर
- परिणाम: 14 नवंबर
लेकिन अब तक न तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और न ही INDIA गठबंधन (महागठबंधन) में सीटों का स्पष्ट बंटवारा हो सका है। दोनों ही खेमों में अंतर्कलह सामने आ रही है।
एनडीए में चिराग पासवान की नाराज़गी
एनडीए में एलजेपी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान अपने लिए मनपसंद सीटें नहीं मिलने से नाराज़ बताए जा रहे हैं। वे गठबंधन में अपनी पार्टी की ताकत के मुताबिक सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। अभी तक बात पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सकी है, जिससे सीट बंटवारे का फार्मूला अधर में लटका हुआ है।
महागठबंधन में भी नहीं बनी बात
वहीं INDIA गठबंधन यानी महागठबंधन में भी स्थिति सहज नहीं है। विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के नेता मुकेश सहनी उपमुख्यमंत्री पद को लेकर अपनी शर्तें रख रहे हैं। वे चाहते हैं कि चुनाव पूर्व ही उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की जाए। उधर, कांग्रेस को लेकर भी सीट बंटवारे की बातचीत अब तक फाइनल नहीं हो सकी है।
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रामविलास पासवान की पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कई नेता भावुक हुए, लेकिन साथ ही बिहार की राजनीति में चल रही खींचतान ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पासवान जैसे नेताओं की विचारधारा आज भी कितनी प्रासंगिक है।
बिहार चुनाव के नतीजे यह तय करेंगे कि कौन गठबंधन इस सामाजिक और राजनीतिक संतुलन को बेहतर ढंग से साध पाता है।









