हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना इन दिनों चर्चा में है। यह परियोजना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर पहल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
क्या है परियोजना का उद्देश्य?
ग्रेट निकोबार परियोजना का मुख्य लक्ष्य अंडमान सागर क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को मजबूत करना है। इसके तहत एक अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल, बेहतर कनेक्टिविटी और रक्षा ढांचे का विकास किया जाएगा। इससे भारत वैश्विक व्यापार और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगा।
पर्यावरण को लेकर क्या तैयारी है?
परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन अधिसूचना, 2006 और तटीय नियमों के तहत किया गया है। इसके लिए विस्तृत ‘पर्यावरण प्रबंधन योजना’ तैयार की गई है, जिसमें जैव विविधता संरक्षण, कोरल रीफ की सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन जैसे उपाय शामिल हैं।
इस प्रक्रिया में इसमें भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई), भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), और सलीम अली पक्षी विज्ञान और प्राकृतिक इतिहास केंद्र (एसएसीओएन) जैसे संस्थानों की भागीदारी रही है।
जंगल और पेड़ों पर क्या असर पड़ेगा?
परियोजना के लिए सीमित क्षेत्र में विकास प्रस्तावित है, जो कुल द्वीप क्षेत्र का छोटा हिस्सा है। कुछ वन भूमि का उपयोग किया जाएगा, लेकिन इसके बदले व्यापक स्तर पर प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की योजना बनाई गई है।
हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
जनजातीय समुदायों की सुरक्षा कैसे होगी?
परियोजना में स्थानीय जनजातीय समुदायों, खासकर संवेदनशील समूहों के अधिकारों को प्राथमिकता दी गई है। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत सभी आवश्यक मंजूरियां ली गई हैं और यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समुदाय का जबरन विस्थापन न हो।
विशेषज्ञों और संबंधित मंत्रालयों से परामर्श के बाद ही योजना को आगे बढ़ाया गया है।
क्या पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन है?
सरकार का दावा है कि यह परियोजना एक संतुलित दृष्टिकोण पर आधारित है, जिसमें विकास के साथ पर्यावरणीय सुरक्षा को भी बराबर महत्व दिया गया है। दीर्घकालिक निगरानी और सख्त नियमों के जरिए पारिस्थितिक प्रभावों को नियंत्रित करने की योजना है।
क्या परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है?
परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल चुकी है और इसकी समीक्षा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा भी की जा चुकी है। अधिकरण ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद प्रक्रिया को सही ठहराया है।
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ग्रेट निकोबार परियोजना भारत के लिए एक बहुआयामी पहल है, जो रणनीतिक मजबूती, आर्थिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन को साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करती है। आने वाले वर्षों में यह परियोजना हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना सकती है।









