ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने जिला परिषद CEO के लिए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल देशभर में पंचायत राज संस्थाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने और जिला स्तर पर प्रशासनिक नेतृत्व को मजबूत करने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई है।
एलबीएसएनएए और पंचायत राज मंत्रालय का संयुक्त प्रयास
पंचायती राज मंत्रालय ने 15 जून 2026 को मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) के सहयोग से इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम का उद्देश्य नव नियुक्त आईएएस अधिकारियों को पंचायत राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली, नीतियों और सरकारी योजनाओं की गहन समझ प्रदान करना है।
जिला स्तर के नेतृत्व को सशक्त बनाने पर फोकस
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विवेक भारद्वाज ने कहा कि जिला परिषदों के CEO के रूप में कार्यरत अधिकारियों की भूमिका ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि मजबूत जिला प्रशासन बेहतर योजना निर्माण, सेवा वितरण और स्थानीय विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय अगले दो वर्षों में देशभर के सभी जिला परिषद CEO को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दायरे में लाने की योजना बना रहा है।
डिजिटल गवर्नेंस और सेवा वितरण पर विशेष जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- पंचायत शासन और प्रशासन
- डिजिटल परिवर्तन और ई-गवर्नेंस
- नागरिक-केंद्रित विकास मॉडल
- सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार
- योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता
- स्थानीय स्तर पर प्रभावी निर्णय प्रक्रिया
इन विषयों के माध्यम से अधिकारियों को आधुनिक प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने और तकनीक आधारित समाधान अपनाने के लिए तैयार किया जाएगा।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर कदम
केंद्र सरकार का मानना है कि मजबूत पंचायतें और सशक्त जिला प्रशासन ही विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की नींव बन सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सेवा वितरण, पारदर्शी प्रशासन और जनभागीदारी को बढ़ावा देकर देश के समग्र विकास को नई गति दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय शासन को अधिक जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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जिला परिषद CEO के लिए शुरू किया गया यह क्षमता निर्माण कार्यक्रम पंचायत राज व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। प्रशासनिक नेतृत्व, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक-केंद्रित विकास पर केंद्रित यह कार्यक्रम न केवल ग्रामीण विकास को गति देगा, बल्कि विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने में भी सहायक साबित हो सकता है।








