डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ जारी युद्ध जल्द समाप्त होने के दावों पर अब सवाल उठने लगे हैं। जहां ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि यह संघर्ष “दो से तीन हफ्तों” में खत्म हो सकता है, वहीं खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स इससे बिल्कुल अलग संकेत दे रही हैं।
ट्रंप ने अपने बयानों में यह भी कहा कि यदि ईरान ने अमेरिका की शर्तें नहीं मानीं, तो उसे “डार्क एज” में धकेल दिया जाएगा। उन्होंने शुरुआत से ही दावा किया था कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म हो चुकी है, यहां तक कि शुरुआती दिनों में उन्होंने ईरान की नौसेना और वायुसेना के नष्ट होने की बात भी कही थी।
हालांकि, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार वास्तविक स्थिति अधिक जटिल है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अनुमान है कि ईरान के मिसाइल भंडार का केवल एक हिस्सा ही पूरी तरह नष्ट किया जा सका है, जबकि बड़ी संख्या में हथियार अब भी उपयोग की स्थिति में हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिसाइल लॉन्चर और क्रूज मिसाइल मौजूद हैं, खासकर उसके दक्षिणी तट पर। यही कारण है कि ईरान लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उसकी युद्ध क्षमता बनी हुई है।
ईरान की ओर से भी इन दावों को खारिज किया गया है कि उसके हथियार खत्म हो रहे हैं। उसकी सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का कहना है कि लगातार हमलों के बावजूद मिसाइल और ड्रोन का उत्पादन जारी है। उनकी रणनीति में भूमिगत ठिकानों और मोबाइल सिस्टम का उपयोग शामिल है, जिससे वे लंबे समय तक हमलों का सामना कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध से पहले ईरान के पास हजारों की संख्या में बैलिस्टिक और शॉर्ट-रेंज मिसाइलें थीं, जिनमें से कई भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखी गई हैं। ऐसे में इन सभी को पूरी तरह नष्ट करना बेहद कठिन है।
अमेरिका का दावा है कि ईरान के हमलों की संख्या में कमी आई है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह कमजोरी नहीं बल्कि रणनीतिक बदलाव भी हो सकता है। ईरान अपने संसाधनों को बचाकर आगे के लिए तैयार कर रहा हो सकता है।
समुद्री मोर्चे पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। भले ही अमेरिका ने ईरान के कई जहाजों को नष्ट करने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ईरान के पास बड़ी संख्या में छोटे और तेज हमलावर नौकाएं हैं, जो खासकर स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज़ जैसे अहम समुद्री मार्गों में बाधा उत्पन्न कर सकती हैं।
यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया के तेल और गैस बाजार पर पड़ सकता है।
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कुल मिलाकर, राजनीतिक बयानों और खुफिया आकलनों के बीच का अंतर इस बात की ओर इशारा करता है कि यह संघर्ष जल्द खत्म होने वाला नहीं है। ईरान अब भी सैन्य रूप से सक्षम है और यदि हालात बिगड़ते हैं, तो यह युद्ध और लंबा तथा गंभीर रूप ले सकता है।









