Trump’s tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज भारत से आने वाले वस्तुओं पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है। उन्होंने यह निर्णय भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद जारी रखने को लेकर लिया है, जिसे उन्होंने दंडात्मक कदम बताया है।
ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे यह अतिरिक्त टैरिफ लागू होगा और यह फैसला उन्होंने अपनी शुरुआती टैरिफ लागू करने की समयसीमा से केवल 14 घंटे पहले लिया।
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इस आदेश के बाद, एक सीमित छूट सूची को छोड़कर, भारतीय वस्तुओं पर कुल टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।जहां प्रारंभिक शुल्क 7 अगस्त से प्रभावी होगा, वहीं यह अतिरिक्त शुल्क 21 दिनों के बाद लागू होगा।
भारत पर इसका क्या असर होगा?
- यह अतिरिक्त टैरिफ भारत से अमेरिका को किए जाने वाले निर्यात की लागत को काफी बढ़ा देगा, विशेष रूप से ऑटो पार्ट्स, वस्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उत्पादों में।
- इस कदम से इस्पात, रसायन और दवा उद्योगों को बड़ा झटका लग सकता है।
- भारत और अमेरिका के बीच व्यापार असंतुलन और अधिक बढ़ सकता है।
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में संभावित बदलाव या पुनर्विचार हो सकता है।
चीन का उल्लेख नहीं
बता दें कि, ट्रंप के इस कार्यकारी आदेश में, जिसमें अतिरिक्त टैरिफ (शुल्क) लगाने की बात कही गई थी, चीन का कोई उल्लेख नहीं था। जबकि चीन भी रूसी तेल का आयात करता है। लेकिन बाद में ट्रंप ने संकेत दिया कि वे चीन से आयातित सामानों पर भी इसी तरह के अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर सकते हैं।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘यह हो सकता है… मैं अभी आपको निश्चित तौर पर नहीं कह सकता। हमने यह भारत के साथ किया है। हम शायद कुछ और देशों के साथ भी ऐसा करने जा रहे हैं। उनमें से एक चीन हो सकता है।’
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप का यह कदम, जनवरी में उनके दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका-भारत संबंधों में सबसे बड़ा तनावपूर्ण मोड़ है। ये टैरिफ भारत की सबसे बड़ी निर्यात बाजार अमेरिका तक पहुंच को खतरे में डाल सकते हैं, जहां भारत ने 2024 में लगभग 87 अरब डॉलर का निर्यात किया था। इससे मेडिसिन, टेक्सटाइल (कपड़ा), फुटवियर, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों पर खासा असर पड़ सकता है।









