आम आदमी पार्टी को शुक्रवार को बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद राघव चड्डा ने पार्टी से इस्तीफे का ऐलान कर दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से भटक चुकी है, जिसके चलते उन्होंने यह फैसला लिया।
राघव चड्ढा ने भावुक अंदाज़ में कहा कि उन्होंने पार्टी को अपने “खून-पसीने से सींचा” और करीब 15 साल का समय दिया, लेकिन अब इसका मौजूदा स्वरूप उन मूल्यों से मेल नहीं खाता जिनके लिए इसे बनाया गया था। उन्होंने खुद को “गलत पार्टी में सही आदमी” बताते हुए कहा कि पार्टी के अंदर वे लंबे समय से घुटन महसूस कर रहे थे।
दो-तिहाई सांसदों के साथ बड़ा दावा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में संदीप पाठक और अशोक मित्तल भी मौजूद रहे। राघव चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं और इस संबंध में हस्ताक्षर भी किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि इस समूह में हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी सहित कई नाम शामिल हैं।
बीजेपी में विलय
सबसे अहम बात यह रही कि राघव चड्ढा ने कहा कि वे और उनके साथ जुड़े सांसद संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करते हुए खुद को भारतीय जनता पार्टी में विलय कर लेंगे।
उन्होंने कहा कि अब उनका लक्ष्य “जनता के करीब जाना” है और देशहित में काम करना है। उनके अनुसार, AAP अब जनहित से ज्यादा निजी हितों पर केंद्रित हो गई है।
राजनीतिक असर
राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं, जिनमें 7 पंजाब और 3 दिल्ली से आते हैं। अगर राघव चड्ढा का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान हो सकता है और राष्ट्रीय राजनीति में नई समीकरणों को जन्म दे सकता है।
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फिलहाल AAP की ओर से इस घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन इस घटनाक्रम ने सियासी गलियारों में हलचल जरूर बढ़ा दी है।









