आम आदमी पार्टी को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 7 राज्यसभा सांसद जिसमें स्वाति मालीवाल भी शामिल है, पार्टी से अलग होकर बीजेपी में शामिल होने का फैसला किया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और कार्यशैली पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
इस्तीफे के बाद स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्होंने यह फैसला काफी सोच-विचार के बाद लिया है। उनका आरोप है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी में भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है और महिलाओं के साथ होने वाले उत्पीड़न के मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी में गलत तत्वों को बढ़ावा दिया जा रहा है और पंजाब के लोगों के साथ वादाखिलाफी हो रही है।
अपने बयान में उन्होंने अपने सामाजिक और राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 2006 में नौकरी छोड़कर देश सेवा का रास्ता चुना था। उन्होंने सूचना का अधिकार आंदोलन, अन्ना हजारे के नेतृत्व में चले जन आंदोलन और आम आदमी पार्टी के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके अलावा, दिल्ली महिला आयोग में लंबे समय तक कार्य करते हुए उन्होंने पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन सिद्धांतों और मूल्यों के साथ पार्टी की शुरुआत हुई थी, अब वह उनसे भटक चुकी है। उनके अनुसार, पार्टी का वर्तमान नेतृत्व उन आदर्शों पर खरा नहीं उतर रहा है, जिनका वादा जनता से किया गया था।
स्वाति मालीवाल ने अपने साथ हुई एक कथित घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनके साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की गई, और इस मामले में दोषियों को बचाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें धमकियां दी गईं और दबाव बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर आगे और खुलासा करेंगी।
इस घटनाक्रम के बीच राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी समेत कई नेताओं के पार्टी से अलग होने की खबरें भी सामने आई हैं।
इस्तीफों के तुरंत बाद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चा ने सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी की अंदरूनी स्थिति और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में इसका असर दिल्ली समेत देश की राजनीति पर पड़ सकता है।









