आम आदमी पार्टी (AAP) को संसद के उच्च सदन में बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सचिवालय ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए सांसदों को औपचारिक मान्यता दे दी है। इस फैसले के बाद अब ये सभी सांसद बीजेपी के सदस्य माने जाएंगे, जिससे उच्च सदन में बीजेपी की ताकत और बढ़ गई है।
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में आम आदमी पार्टी की संख्या घटकर काफी सीमित रह गई है। वहीं बीजेपी के सांसदों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो आने वाले विधायी कामकाज पर असर डाल सकता है।
AAP की आपत्ति खारिज
इससे पहले AAP की ओर से इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना था कि ये कदम दल-बदल कानून के खिलाफ है और मतदाताओं के विश्वास के साथ धोखा है।
हालांकि, राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना ने स्पष्ट कर दिया कि AAP की इस मांग को स्वीकार नहीं किया गया है।
क्यों हुआ विवाद?
दरअसल, हाल ही में AAP के सात सांसदों ने पार्टी से अलग होने का ऐलान किया था। इन नेताओं ने आरोप लगाया था कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। साथ ही उन्होंने संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होते हैं, तो इसे वैध माना जा सकता है।
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इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ AAP के भीतर असंतोष को उजागर किया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई तेज होने की संभावना है।









