उत्तराखंड पंचायत चुनाव 2025 की नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब नामांकन पत्रों की जांच की प्रक्रिया चल रही है। इस बार का पंचायत चुनाव राज्य में लोकतंत्र की जड़ें और मजबूत करने वाला साबित हो रहा है, खासकर महिला सशक्तीकरण के संदर्भ में।
राज्य भर में पंचायतों के 66,418 पदों के लिए कुल 63,595 नामांकन पत्र दाखिल हुए हैं। इसमें सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि 37,356 महिला उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में उतरकर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह कुल नामांकन का करीब 59 प्रतिशत है, जो बताता है कि राज्य की महिलाएं अब सिर्फ मतदान तक सीमित नहीं, बल्कि नेतृत्व की मुख्यधारा में आ चुकी हैं।
हर स्तर पर महिलाओं की दमदार उपस्थिति
राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंचायत के तीनों स्तरों पर महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया है:
जिला पंचायत सदस्य (358 पद):
कुल नामांकन – 1885,
महिला प्रत्याशी – 931क्षेत्र पंचायत सदस्य (2874 पद):
कुल नामांकन – 11478,
महिला प्रत्याशी – 6221ग्राम प्रधान (7499 पद):
कुल नामांकन – 21912,
महिला प्रत्याशी – 12510ग्राम पंचायत सदस्य (55587 पद):
कुल नामांकन – 28294,
महिला प्रत्याशी – 17694
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि महिलाएं न केवल अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं, बल्कि अब पंचायत जैसे अहम प्रशासनिक ढांचे में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं।
सामाजिक समरसता की झलक
नामांकन प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रत्याशियों की भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली।
अनुसूचित जनजाति – 2401 नामांकन
अनुसूचित जाति – 11208 नामांकन
अन्य पिछड़ा वर्ग – 4532 नामांकन
यह आंकड़े राज्य की सामाजिक विविधता और चुनावी भागीदारी में सभी वर्गों की हिस्सेदारी को रेखांकित करते हैं।
निर्वाचन आयोग की सराहना
राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राहुल कुमार गोयल ने बताया कि नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण और पारदर्शी रही है। उन्होंने कहा कि महिला और आरक्षित वर्गों की भागीदारी ने इस चुनाव को विशेष और प्रेरणादायी बना दिया है।
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उत्तराखंड में पंचायत चुनाव की यह प्रक्रिया केवल लोकतांत्रिक कर्तव्यों की पूर्ति नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के नेतृत्व में बढ़ते कदमों और समावेशी राजनीति की ओर बढ़ते समाज का प्रतीक है। आने वाले समय में पंचायत स्तर पर महिलाओं की निर्णायक भूमिका राज्य के विकास को नई दिशा दे सकती है।









