पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार करते हुए सोमवार (1 जून 2026) को 35 नए मंत्रियों को शामिल किया। लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर. एन. रवि ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
मंत्रिमंडल विस्तार के तहत 13 नेताओं को कैबिनेट मंत्री, 3 को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री और 19 विधायकों को राज्य मंत्री बनाया गया है। इस विस्तार के साथ ही राज्य सरकार का प्रशासनिक ढांचा और मजबूत हो गया है।
चुनावी जीत के बाद पहला बड़ा विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद 9 मई को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ली थी। उस समय उनके साथ केवल पांच मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की थी। सरकार बनने के बाद लंबे समय तक मुख्यमंत्री के पास कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही।
करीब तीन सप्ताह बाद हुए इस कैबिनेट विस्तार को सरकार के दूसरे चरण की शुरुआत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे शासन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
इन नेताओं को मिला कैबिनेट में स्थान
नए कैबिनेट मंत्रियों में कई अनुभवी और चर्चित नेताओं को जगह दी गई है। कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने वालों में दीपक बर्मन, तापस रॉय, डॉ. शंकर घोष, मनोज कुमार उरांव, अर्जुन सिंह, गौरी शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कल्याण चक्रवर्ती, अजय पोद्दार, सारदवत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल और अनुप कुमार दास शामिल हैं।
स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री
सरकार ने तीन नेताओं को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया है। इनमें डॉ. इंद्रनील खान, मालती राव रॉय और राजेश महतो शामिल हैं। इन नेताओं को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
राज्य मंत्रियों की लंबी सूची
राज्य मंत्री के तौर पर शपथ लेने वालों में जोएल मुर्मू, हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नदियार चंद बाउरी, विशाल लामा, शांतनु प्रमाणिक, मौमिता विश्वास मिश्रा, उमेश रे, पूर्णिमा चक्रवर्ती, कौशिक चौधरी, भास्कर भट्टाचार्य, दिबाकर घरामी, अमिया किस्कू, कलिता माझी, गार्गी दास घोष, बिराज विश्वास, दीपंकर जना और सुमना सरकार शामिल हैं।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर फोकस
मंत्रिमंडल विस्तार में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश दिखाई दी है। सरकार ने आदिवासी, ग्रामीण, शहरी और सीमावर्ती क्षेत्रों के नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल कर संतुलन साधने का प्रयास किया है।
सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी?
नई कैबिनेट के गठन के बाद अब सरकार की प्राथमिकता बुनियादी ढांचे का विकास, रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करना, कृषि सुधार और सामाजिक कल्याण योजनाओं को गति देना होगी। माना जा रहा है कि विभागों के बंटवारे के बाद सरकार अपनी नीतियों और आगामी विकास एजेंडे को लेकर बड़ा रोडमैप पेश कर सकती है।
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राजनीतिक तौर पर भी यह विस्तार महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे भाजपा सरकार को विधानसभा चुनाव में मिले जनादेश को प्रशासनिक स्तर पर लागू करने में मदद मिलेगी।









