What are Green Crackers: हर साल दिवाली के मौके पर पटाखों के शोर और धुएं से हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो जाती है। इस समस्या से निपटने के लिए ग्रीन पटाखों (Green Crackers) की शुरुआत की गई थी। ये ऐसे पटाखे हैं जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में कम प्रदूषण और कम धुआं पैदा करते हैं।
ग्रीन पटाखे क्या हैं?
ग्रीन पटाखे वे पटाखे हैं जिन्हें वैज्ञानिक रूप से इस तरह बनाया गया है कि वे हानिकारक रसायनों जैसे कि बोरॉन, एल्युमिनियम, पोटैशियम नाइट्रेट और कार्बन की मात्रा को सीमित रखते हैं। इन पटाखों को CSIR-NEERI (Council of Scientific and Industrial Research – National Environmental Engineering Research Institute) ने विकसित किया है।
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कैसे काम करते हैं ग्रीन पटाखे?
ग्रीन पटाखों में ऐसे तत्वों का उपयोग किया जाता है जो:
- कम धुआं और कम आवाज़ पैदा करते हैं,
- और धूल कणों (PM 2.5 और PM 10) की मात्रा को 30% तक कम करते हैं।
- इन पटाखों में पारंपरिक सल्फर और नाइट्रेट की जगह पर्यावरण-अनुकूल यौगिक (eco-friendly compounds) इस्तेमाल किए जाते हैं।
QR कोड से पहचान
हर ग्रीन पटाखे पर एक QR कोड होता है, जिससे उपभोक्ता यह सत्यापित कर सकते हैं कि पटाखा असली ग्रीन है या नहीं। यह QR कोड CSIR-NEERI द्वारा प्रमाणित होता है।
ग्रीन पटाखों के प्रकार
SWAS (Safe Water Releaser): यह 30% तक कम प्रदूषण करता है और पानी छोड़ने वाली गैसें निकालता है, जो प्रदूषण को नियंत्रित करती हैं।
- STAR (Safe Thermite Cracker): इसमें कोई हानिकारक धुआं या गैस नहीं निकलती।
- SAFAL (Safe Minimal Aluminum): इसमें एल्युमिनियम की मात्रा बेहद कम होती है, जिससे कम धुआं और कम आवाज़ होती है।
क्यों जरूरी हैं ग्रीन पटाखे?
पारंपरिक पटाखे हवा में कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे जहरीले गैसों को छोड़ते हैं। ये गैसें सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अस्थमा जैसी बीमारियों को बढ़ाती हैं। ग्रीन पटाखे इन खतरनाक गैसों को काफी हद तक कम कर देते हैं।
कानूनी स्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने कई बार यह स्पष्ट किया है कि देशभर में केवल ग्रीन पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की अनुमति है।
इसके अलावा, निर्धारित समय (जैसे शाम 6 बजे से 10 बजे तक) में ही पटाखे फोड़ने की अनुमति दी जाती है।









