बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी कड़ी में राज्य की सत्ता में शामिल जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में 59 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा इस बात की हो रही है कि सूची में किसी भी मुस्लिम चेहरे को टिकट नहीं दिया गया है। यह फैसला बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े कर रहा है।
टिकट वितरण में नई और पुरानी सियासी चालें
इस सूची में कुछ पुराने चेहरों को दोबारा मौका दिया गया है, तो कई सिटिंग विधायकों के टिकट काट दिए गए हैं। वहीं, पार्टी ने कुछ नए और रणनीतिक चेहरों को उतार कर समीकरण साधने की कोशिश की है।
गायघाट सीट से कोमल सिंह को टिकट
सबसे चर्चित नामों में से एक कोमल सिंह का है, जिन्हें गायघाट सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। कोमल सिंह, लोजपा (रामविलास) सांसद वीणा देवी की बेटी हैं और उनके पिता दिनेश सिंह जेडीयू से एमएलसी हैं। पहले अटकलें थीं कि कोमल सिंह लोजपा (रामविलास) से चुनाव लड़ेंगी, लेकिन जब सीट जेडीयू के हिस्से में आई, तो उन्हें वहां से उतारा गया।
पुराने चेहरों का टिकट कटा
बरबीघा से सिटिंग विधायक सुदर्शन कुमार और कुशेश्वरस्थान से अमन भूषण हजारी का टिकट काट दिया गया है। इनकी जगह क्रमशः कुमार पुष्पंजय और अतिरेक कुमार को उम्मीदवार बनाया गया है।
पार्टी में आए दलबदलुओं को मिला मौका
परसा सीट से छोटे लाल यादव को जेडीयू ने प्रत्याशी बनाया है। छोटे लाल यादव पहले राजद से विधायक थे और हाल ही में जेडीयू में शामिल हुए हैं। 2020 में वे आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल कर चुके हैं।
इन नामों पर भी रहेगी नजर
- मधेपुरा से कविता साहा
- फुलवारी से श्याम रजक
- मोकामा से अनंत सिंह
- नालंदा से श्रवण कुमार
- महनार से उमेश सिंह कुशवाहा
मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर सवाल
जेडीयू की इस पहली सूची में एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिए जाने से पार्टी के अल्पसंख्यक समर्थन आधार पर सवाल उठने लगे हैं। बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोटरों की संख्या काफी अहम मानी जाती है। ऐसे में जेडीयू का यह कदम न केवल चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि गठबंधन की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
पूरी सूची में शामिल प्रमुख उम्मीदवारों के नाम:
- अलमनगर – नरेंद्र नारायण यादव
- सकरा – आदित्य कुमार
- राजगीर – कौशल किशोर
- मसौढ़ी – अरुण मांझी
- राजपुर – संतोष कुमार निराला
- डुमरांव – राहुल सिंह
- इस्लामपुर – रुहेल रंजन
- हसनपुर – राजकुमार राय
- बिहारीगंज – निरंजन कुमार मेहता
- वारिसनगर – मांजरीक मृणाल



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जेडीयू की पहली सूची ने जहां कई सियासी समीकरणों को जन्म दिया है, वहीं पार्टी के भीतर टिकट वितरण को लेकर चल रही अंतर्कलह को भी उजागर किया है। अब देखना होगा कि आने वाली दूसरी सूची में पार्टी अपने फैसलों से क्या संदेश देना चाहती है और क्या मुस्लिम समुदाय को उसमें प्रतिनिधित्व मिलेगा।









