2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी, जिसके बाद पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर ने इसकी पूरी जिम्मेदारी खुद पर ली। हार के बाद वे गुरुवार को चंपारण स्थित भितिहरवा आश्रम पहुंचे—वही स्थान जहां से उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत हुई थी। आश्रम पहुंचकर उन्होंने 24 घंटे का मौन और उपवास रखा और चुनावी प्रदर्शन पर आत्ममंथन किया।
शुक्रवार सुबह मौन व्रत तोड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भविष्य की रणनीति और बड़े संकल्पों का ऐलान किया।
15 जनवरी से शुरू होगा नया अभियान
पीके ने कहा कि वे गांधी जी की प्रेरणा से आंदोलन को दोबारा तेज करेंगे। उन्होंने घोषणा की कि 15 जनवरी से वे बिहार के सभी 1 लाख 18 हजार वार्डों में जाएंगे और ‘बिहार नवनिर्माण संकल्प अभियान’ के तहत जनता से सीधे जुड़ेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करवाना उनका मुख्य लक्ष्य होगा। विद्यालय की छात्राओं ने जूस और पानी पिलाकर उनका मौन व्रत खत्म कराया।
सरकार पर ‘पैसे से वोट खरीदने’ का आरोप
प्रशांत किशोर ने सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले गरीबों को 10,000 रुपये बांटकर वोट खरीदे गए और दो लाख रुपये देने का झूठा वादा कर जनता को भ्रमित किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में खुलेआम पैसे देकर वोट खरीदने की घटनाएं देखने को मिलीं।
नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “अब उन्हें ईमानदार मुख्यमंत्री कहना मुश्किल हो गया है, क्योंकि उनकी सरकार में अपराधी छवि वाले लोगों को मंत्री बनाया गया है।”
प्रशांत किशोर का बड़ा ऐलान: 90% संपत्ति जन सुराज को दान
मौन व्रत टूटते ही पीके ने व्यक्तिगत स्तर पर बड़ा निर्णय लेने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वे अपनी कुल कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को समर्पित करेंगे। साथ ही पिछले 20 वर्षों में अर्जित संपत्ति में से, परिवार के घर को छोड़कर बाकी सब पार्टी के लिए दान करने का फैसला किया है।
समर्थकों से ‘एक हजार रुपये वार्षिक योगदान’ की अपील
पीके ने जन सुराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों से अपील की कि हर सदस्य साल में कम से कम 1000 रुपये संगठन को दें, ताकि राजनीतिक आंदोलन को एक मजबूत आर्थिक आधार मिल सके।
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उन्होंने कहा, “हम भले चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन हमारी लड़ाई खत्म नहीं हुई है। जिस आश्रम से सफर शुरू हुआ था, वहीं लौटकर मैंने नए संकल्प के साथ कदम बढ़ाए हैं। आने वाले समय में जन सुराज एक मजबूत राजनीतिक ताकत के रूप में उभरेगा।”








