अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का प्रभाव आज से लागू हो गया है। यह फैसला भारत द्वारा रूस से तेल खरीदना जारी रखने के कारण लिया गया है। टैरिफ के लागू होने के साथ ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस फैसले ने न केवल दोनों देशों में हलचल मचा दी है, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं।
अमेरिका का आरोप: रूस से तेल खरीद बना विवाद की वजह
ट्रंप प्रशासन का साफ कहना है कि जब तक भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता, तब तक यह आर्थिक दबाव बनाए रखा जाएगा। व्हाइट हाउस ने इस निर्णय को “राष्ट्रहित” से जोड़ा है और कहा है कि यह कदम अमेरिका की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
CNN का विश्लेषण: अमेरिका ने भारत को खो दिया
अमेरिका के प्रतिष्ठित न्यूज़ नेटवर्क CNN ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनके विश्लेषण में कहा गया है कि इस टैरिफ ने अमेरिका को भारत जैसे रणनीतिक साझेदार से दूर कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे दोनों देशों के व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को गहरी चोट पहुंचेगी। CNN की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अमेरिका में महंगाई और श्रम संकट पहले से मौजूद हैं और अब भारतीय सामान पर भारी शुल्क लगने से उपभोक्ताओं पर और बोझ बढ़ेगा।
गार्जियन का कड़ा रुख: अब तक की सबसे बड़ी क्षति
ब्रिटेन के अखबार The Guardian ने इसे भारत-अमेरिका संबंधों में सबसे बड़ी गिरावट बताया है। रिपोर्ट में एक भारतीय अधिकारी के हवाले से कहा गया कि “ट्रंप ने सब कुछ दांव पर लगा दिया है” और अब दोनों देशों को पुराने भरोसे के स्तर पर लौटने में लंबा समय लगेगा। गार्जियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को भी छापा, जिसमें उन्होंने कहा, “हम दबाव में नहीं झुकेंगे, मुकाबला करेंगे।”
रॉयटर्स की रिपोर्ट: छोटे निर्यातक और नौकरियों पर संकट
Reuters ने अपने विश्लेषण में बताया कि इस फैसले से भारत के हजारों छोटे और मझोले निर्यातकों की कमर टूट सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच बीते महीनों में पांच दौर की वार्ताएं चलीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। भारत चाहता था कि टैरिफ की दर अन्य सहयोगी देशों की तरह 15% तक सीमित रहे, पर ट्रंप प्रशासन ने इसे खारिज कर दिया।

चीन और ब्रिक्स देशों का समर्थन
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि यह अमेरिका की ‘अत्यधिक प्रतिक्रिया’ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से चार बार बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके साथ ही ब्रिक्स देशों ने संयुक्त रूप से इस कदम की आलोचना की है और वैश्विक मंचों पर एक नई रणनीतिक धुरी बनाने की बात कही है।
अल जज़ीरा और AP की चेतावनी: अर्थव्यवस्था पर असर
Al Jazeera और Associated Press (AP) दोनों ने इस फैसले को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है। अल जज़ीरा के अनुसार, भारत का अमेरिका को निर्यात 87 अरब डॉलर से अधिक का है और अब इसमें भारी गिरावट की आशंका है। वहीं AP ने अनुमान जताया है कि इससे देश की जीडीपी पर असर पड़ेगा और रोजगार के अवसरों में गिरावट आ सकती है।
भारत की प्रतिक्रिया का इंतजार
भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस टैरिफ का जवाब देने के लिए तैयार है। वाणिज्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जवाबी शुल्क लगाने सहित सभी विकल्प खुले हैं। यह देखना बाकी है कि भारत इस चुनौती का किस तरह से जवाब देता है और क्या दोनों देश एक बार फिर बातचीत की मेज पर लौट सकते हैं।
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भारत पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ से वैश्विक व्यापार जगत में हलचल मच गई है। जहां एक ओर इसे अमेरिका की ‘दबाव की राजनीति’ माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत की कूटनीतिक और आर्थिक प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह व्यापार युद्ध रिश्तों को कितना पीछे ले जाएगा या कोई समाधान निकलेगा।









