Jagdeep Dhankhar resigns: सोमवार, 21 जुलाई 2025 की शाम देश की राजनीति में तब हलचल मच गई जब उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफे दे दिया।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के चौंकाने वाले इस्तीफे के बाद सियासी विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने इस फैसले को राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में महत्वपूर्ण मंत्रियों जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू की गैरहाज़िरी से जोड़ दिया है, साथ ही राज्यसभा में नड्डा के दिए एक बयान को भी कारण बताया है।
BAC की बैठक और विवाद की शुरुआत
बैठक का पहला सत्र दोपहर 12:30 बजे हुआ, जिसमें जेपी नड्डा और रिजिजू दोनों उपस्थित थे। बैठक के दौरान कुछ चर्चा के बाद इसे शाम 4:30 बजे फिर से बुलाने का फैसला किया गया। लेकिन शाम की बैठक में दोनों मंत्री अनुपस्थित रहे। उनकी जगह पर केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन ने सरकार का प्रतिनिधित्व किया और उपराष्ट्रपति से बैठक को अगले दिन के लिए टालने का अनुरोध किया।
यह भी पढ़ें- जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग की प्रक्रिया शुरू, राज्यसभा में 60 से अधिक सांसदों ने किया समर्थन
सूत्रों के मुताबिक, बैठक दोनों बार बेनतीजा रही, और उपराष्ट्रपति इस बात से नाराज़ थे कि उन्हें मंत्रियों की अनुपस्थिति की व्यक्तिगत रूप से सूचना नहीं दी गई।
जेपी नड्डा ने दी सफाई
जेपी नड्डा ने अपने बयान में कहा, ‘मैं और किरेन रिजिजू संसद से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण कामों में व्यस्त थे, और हमने पूर्व सूचना उपराष्ट्रपति के कार्यालय को दे दी थी।’
विवादित बयान पर भी सफाई
राज्यसभा में दिए अपने बयान ‘सिर्फ मैं जो कहूंगा वही रिकॉर्ड में जाएगा’ को लेकर भी नड्डा विपक्ष के निशाने पर आ गए। उन्होंने सफाई दी कि, यह बयान अध्यक्ष के खिलाफ नहीं, बल्कि विरोध कर रहे विपक्षी सांसदों को संबोधित था।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता जयराम रमेश, जो BAC के सदस्य भी हैं, ने कहा, ‘बैठक में सभी सदस्यों ने मंत्रियों का इंतज़ार किया, लेकिन वे नहीं आए। उपराष्ट्रपति को व्यक्तिगत रूप से जानकारी नहीं दी गई, जो कि अनादरपूर्ण था। इसलिए उन्होंने बैठक को अगले दिन 1 बजे के लिए स्थगित कर दिया। कुछ बहुत गंभीर हुआ है, जो अब सामने आना चाहिए।’









