Karnataka sex scandal Prajwal Revanna: पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना ने शनिवार को बेंगलुरु की एक विशेष अदालत द्वारा रेप मामले में दोषी ठहराए जाने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। पूर्व सांसद ने कहा कि उनकी एकमात्र गलती यह थी कि वह राजनीति में तेज़ी से आगे बढ़े। उन्होंने अदालत से कम सजा की मांग की।
उदय से पतन तक की कहानी
कर्नाटक के प्रभावशाली गौड़ा परिवार के उभरते हुए राजनीतिक सितारे के रूप में पहचाने जाने वाले प्रज्वल रेवन्ना आज दोषी करार दिए गए हैं, वो भी बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में। 33 वर्षीय पूर्व सांसद (हासन से) और निलंबित जेडीएस नेता प्रज्वल रेवन्ना को शुक्रवार को चार बलात्कार और यौन शोषण के मामलों में से एक में एक विशेष अदालत ने दोषी ठहराया।
यह मामला मई 2024 में सामने आया था और महज 14 महीनों में कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया, जिसे यौन अपराधों में त्वरित न्याय का मिसाल माना जा रहा है। यह मामला 2021 में होलेनरसीपुरा के गन्निकाडा फार्महाउस में 48 वर्षीय घरेलू सहायिका के साथ यौन उत्पीड़न से जुड़ा है।
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कौन हैं प्रज्वल रेवण्णा
प्रज्वल रेवन्ना पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौड़ा के पोते, एच. डी. रेवन्ना के बेटे और पूर्व कर्नाटक मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के भतीजे हैं। उन्होंने एक समय हासन से लोकसभा सांसद के रूप में सेवा दी थी, लेकिन हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में उन्हें इन मामलों के चलते करारी हार का सामना करना पड़ा।
प्रज्वल पर कई महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और उनके आपत्तिजनक वीडियो रिकॉर्ड करने का आरोप लगाया है। 27 अप्रैल को, कर्नाटक राज्य महिला आयोग के आग्रह पर राज्य सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, ताकि प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन शोषण और शोषण के वीडियो क्लिप्स की जांच की जा सके।
गौड़ा परिवार की राजनीतिक विरासत हासन ज़िले में गहराई से जुड़ी हुई है, जिसकी शुरुआत एच. डी. देवगौड़ा ने होलेनरसीपुर विधानसभा सीट से की थी और वे बाद में देश के प्रधानमंत्री भी बने।
आरोप और धाराएं
इस साल की शुरुआत में विशेष अदालत ने प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ निम्न धाराओं के तहत आरोप तय किए थे:
- धारा 376(2)(k): ऐसी महिला से बलात्कार, जिस पर किसी प्रकार का नियंत्रण या प्रभाव हो
- धारा 376(2)(n): एक ही महिला से बार-बार बलात्कार
- धारा 354A: यौन उत्पीड़न
- धारा 354B: जबरन कपड़े उतारना
- धारा 354C: झांकना/छिपकर देखना (वॉयरिज़्म)
- धारा 506: आपराधिक धमकी
- धारा 201: सबूत मिटाना
- आईटी एक्ट की धारा 66E: निजता का उल्लंघन
यह मामला न सिर्फ प्रज्वल रेवन्ना की राजनीतिक छवि के अंत को दर्शाता है, बल्कि गौड़ा परिवार की छवि और कर्नाटक की राजनीति पर भी गहरा असर डाल रहा है।








