केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 3 नवंबर 2025 को इसके Terms of Reference (ToR) को मंजूरी दे दी है। इस तीन सदस्यीय आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति रंजना देसाई करेंगी। आयोग का काम केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों की समीक्षा करना होगा।
हालांकि, इस फैसले के बाद अब केंद्रीय पेंशनर्स और पारिवारिक पेंशनर्स में नाराजगी बढ़ गई है, क्योंकि करीब 69 लाख पेंशनर्स को इस आयोग के दायरे से बाहर रखने की बात सामने आई है।
पेंशनर्स के बहिष्कार पर बढ़ा विवाद
केंद्रीय पेंशनर्स को बाहर रखे जाने के फैसले के विरोध में ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन ने इस मुद्दे को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखा है।
फेडरेशन का कहना है कि जो कर्मचारी तीन दशक से अधिक समय तक देश की सेवा कर चुके हैं, उन्हें वेतन आयोग की समीक्षा से दूर रखना अनुचित और भेदभावपूर्ण है। पत्र में AIDEF ने लिखा है कि पेंशन रीविजन पेंशनर्स का संवैधानिक अधिकार है और उन्हें 8वें वेतन आयोग के ToR से बाहर रखना “नाइंसाफी” होगी।
किन कर्मचारियों की सैलरी की समीक्षा होगी
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, 8वां वेतन आयोग निम्नलिखित श्रेणियों के कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की समीक्षा करेगा —
- केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी
- ऑल इंडिया सर्विसेज से जुड़े अधिकारी
- सशस्त्र बलों (Defence Forces) के कर्मचारी
- केंद्र शासित प्रदेशों के अधीन कर्मचारी
- भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग (IA&AD) के अधिकारी
- संसद के अधिनियमों से गठित नियामक निकायों के सदस्य (RBI को छोड़कर)
- सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अधिकारी एवं कर्मचारी
- केंद्र शासित प्रदेशों के अधीनस्थ न्यायिक अधिकारी
हालांकि, पेंशनधारियों को लेकर अधिसूचना में कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं किया गया है।
रिपोर्ट आने में लगेगा 18 महीने
सूत्रों के अनुसार, आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में करीब 18 महीने का समय लग सकता है। इसके बाद यह तय होगा कि कर्मचारियों का नया पे स्ट्रक्चर, पेंशन रीविजन और अलाउंस स्ट्रक्चर कैसा होगा।
7वें और 8वें वेतन आयोग में अंतर
कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि 7वें वेतन आयोग में पेंशन संशोधन से जुड़े प्रावधान शामिल थे, लेकिन इस बार 8वें वेतन आयोग के ToR में इसे हटा दिया गया है। यही कारण है कि रिटायर हो चुके कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ी हुई है।
कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदें
केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि नए आयोग की सिफारिशों से वेतन और भत्तों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। वहीं पेंशनर्स यह मांग कर रहे हैं कि उन्हें भी आयोग के दायरे में शामिल किया जाए ताकि महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के अनुरूप उनकी पेंशन में भी संशोधन हो सके।
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फिलहाल सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का दबाव बढ़ता जा रहा है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि क्या 8वां वेतन आयोग पेंशनर्स को अपने दायरे में शामिल करेगा या नहीं।









