Parliament Monsoon session 2025: संसद के मॉनसून सत्र में ऑपरेशन सिंदूर पर बहस का माहौल है। राज्यसभा में मानसून सत्र के 11वें दिन मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को छह महीने और बढ़ाने के लिए एक वैधानिक प्रस्ताव पर चर्चा होगी, साथ ही 2025 का ‘कैरेज ऑफ गुड्स बाय सी बिल’ (Carriage of Goods by Sea Bill, 2025) भी विचार हेतु प्रस्तुत किया जाएगा। सत्र की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन को 13 अगस्त से अगले छह महीनों तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।
अमित शाह का राज्यसभा में भाषण
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में बहस के समापन पर गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कांग्रेस पर जोरदार हमला किया। उन्होंने कहा, ‘आपने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को दे दिया, और उसे वापस लेना हमारी जिम्मेदारी है।’
शाह ने आगे कहा कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकवादियों की पहचान हो चुकी है और इससे यह साबित होता है कि पहलगाम हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था।
जैसे ही शाह ने अपना भाषण शुरू किया, विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई, जिसके बाद विपक्ष के सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया।
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में चर्चा
लोकसभा में सोमवार से और राज्यसभा में मंगलवार से ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा शुरू हुई थी। दोनों सदनों में यह 16 घंटे लंबी बहस चली, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार का पक्ष रखा।
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वहीं विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, कनिमोझी और अखिलेश यादव ने सरकार से जवाबदेही और पहलगाम में सुरक्षा चूक को लेकर तीखे सवाल पूछे।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने यहां तक पूछा कि ‘क्या अमित शाह को इस्तीफा नहीं देना चाहिए?’
पीएम मोदी ने की अमित शाह की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को राज्यसभा में अमित शाह के भाषण को ‘शानदार’ बताते हुए कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद पर सरकार की नीति को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर मोदी ने लिखा, ‘गृह मंत्री अमित शाह जी का राज्यसभा में दिया गया भाषण अद्भुत है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के नेटवर्क को उखाड़ने और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया है।’
मोदी ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भाषण को भी असाधारण करार दिया और कहा कि भारत आतंकवाद को वैश्विक एजेंडे पर लाने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।









