लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल सरकार और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने राजनीतिक कारणों से किसानों को कई केंद्रीय योजनाओं से दूर रखा है, जिससे गरीब किसानों को नुकसान हुआ है।
कृषि मंत्री ने कहा कि केवल प्रधानमंत्री के नाम से आपत्ति होने के कारण कई योजनाओं को राज्य में पूरी तरह लागू नहीं किया गया। उन्होंने इसे किसानों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि जनता ऐसे फैसलों को लंबे समय तक स्वीकार नहीं करेगी।
योजनाओं को लागू न करने का आरोप
संसद में बोलते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार की कई कृषि योजनाएँ देश के अधिकांश जिलों में लागू हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल के कुछ सीमावर्ती जिलों में उन्हें लागू नहीं किया गया। उनका कहना था कि इन योजनाओं का उद्देश्य खेती की लागत कम करना, सिंचाई सुविधाओं में सुधार करना और किसानों को बेहतर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की राजनीतिक सोच के कारण किसानों तक इन योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाया।
फसल बीमा और प्राकृतिक खेती पर भी विवाद
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र की महत्त्वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया गया, जिससे किसानों को फसल नुकसान की स्थिति में सुरक्षा नहीं मिल पाती। इसके अलावा उन्होंने प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई राज्यों ने इसे अपनाया है, लेकिन पश्चिम बंगाल में इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
विपक्ष पर भी निशाना
लोकसभा में विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि कुछ दल संसद में नारेबाजी और विरोध कर रहे हैं, लेकिन देश की जनता यह देख रही है कि किसानों के मुद्दों पर कौन गंभीर है और कौन केवल राजनीति कर रहा है।
खाद्यान्न उत्पादन में रिकॉर्ड का दावा
केंद्रीय मंत्री ने सरकार की कृषि उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन करीब 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि चावल, गेहूं, सरसों और अन्य फसलों के उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मंत्री के अनुसार, भारत ने चावल उत्पादन में वैश्विक स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है और अब देश के गोदामों में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार मौजूद है।
दालों और बागवानी उत्पादन में भी बढ़ोतरी
सरकार का दावा है कि पिछले वर्षों में दालों का उत्पादन लगभग 19 मिलियन टन से बढ़कर 25–26 मिलियन टन के करीब पहुंच गया है। वहीं फल-सब्जियों समेत बागवानी उत्पादन भी 369 मिलियन टन से अधिक हो चुका है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन रहा है।
प्राकृतिक खेती पर सरकार का जोर
कृषि मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर सरकार मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और खेती की लागत घटाने की दिशा में काम कर रही है। इस मॉडल में स्थानीय संसाधनों जैसे गोबर, गोमूत्र और जैविक तत्वों के उपयोग से खेती करने पर जोर दिया जाता है।
उनका कहना था कि सही तरीके से अपनाने पर प्राकृतिक खेती से उत्पादन कम नहीं होता, बल्कि कई जगहों पर बेहतर परिणाम सामने आए हैं।
यह भी पढ़ें: जल जीवन मिशन को 2028 तक बढ़ाने की मिली मंजूरी
भारत को ‘फूड बास्केट’ बनाने का लक्ष्य
अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न उत्पादन का मजबूत केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में भारत की भूमिका मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।








