नेपाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 35 वर्षीय बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन शाह के नाम से भी जाना जाता है, ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं और नई पीढ़ी की राजनीति का चेहरा माने जा रहे हैं।
Gen-Z नेतृत्व का उभार
बालेन शाह का उदय केवल एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि Gen-Z पीढ़ी के उभार का प्रतीक माना जा रहा है। रैपर, इंजीनियर और फिर नेता बने बालेन ने युवाओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई है।
वे मधेस क्षेत्र से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता भी हैं, जिससे क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को नई दिशा मिली है।
दिग्गज नेता को दी बड़ी चुनौती
बालेन ने चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को भारी अंतर से हराया। ओली पहले चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं, ऐसे में यह जीत नेपाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है।

काठमांडू के मेयर से प्रधानमंत्री तक का सफर
साल 2022 में बालेन ने काठमांडू के मेयर पद पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। उनके कार्यकाल में शहर में सुधार और सौंदर्यीकरण के कई प्रयास किए गए, जिससे उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी।
आंदोलन से निकला नया नेतृत्व
देश में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद राजनीतिक माहौल बदला। उस समय बालेन को अंतरिम नेतृत्व के लिए पसंद किया गया था, लेकिन उन्होंने चुनाव के जरिए जनादेश लेने को प्राथमिकता दी।
नई पार्टी के साथ नई शुरुआत
जनवरी में बालेन राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में शामिल हुए और जल्द ही पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया। उनकी साफ छवि और युवाओं के समर्थन ने उन्हें जीत दिलाई।
शिक्षा, संगीत और निजी जीवन
काठमांडू में जन्मे बालेन ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और आगे उच्च शिक्षा भारत के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से प्राप्त की।
संगीत और कविता में रुचि रखने वाले बालेन एक लोकप्रिय रैपर भी रहे हैं। उन्होंने 2018 में सबीना काफले से विवाह किया और उनकी एक बेटी है। उनके यूट्यूब चैनल पर भी बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं।
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बालेन शाह का प्रधानमंत्री बनना नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है। युवा नेतृत्व, नई सोच और जनसमर्थन के साथ वे देश को किस दिशा में ले जाएंगे, इस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।









