पंचायती राज मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में सरकारी कामकाज और पंचायत स्तर पर हिंदी के अधिक व्यापक, सरल और व्यवहारिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया। केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि मंत्रालय का काम सीधे ग्राम पंचायतों और ग्रामीण आबादी से जुड़ा है, ऐसे में प्रशासनिक संवाद को सहज बनाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
बैठक के दौरान समिति के सदस्यों की ओर से दिए गए सुझावों की भी चर्चा हुई। मंत्री ने इन सुझावों को हिंदी के प्रभावी प्रयोग को बढ़ाने की दिशा में उपयोगी बताया और पंचायत स्तर पर हिंदी के इस्तेमाल को और मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
ग्राम पंचायतों के दैनिक कामकाज में बढ़े हिंदी का प्रयोग
प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने कहा कि हिंदी को सिर्फ औपचारिक सरकारी कार्यों तक सीमित रखने के बजाय ग्राम सभा और पंचायतों के रोजमर्रा के कामकाज में भी अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक योजनाओं, सरकारी निर्णयों और पंचायत से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में उपलब्ध कराने से आम लोगों तक सूचनाओं की पहुंच बेहतर हो सकती है। उन्होंने मंत्रालय द्वारा हिंदी के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों को आगे और मजबूत करने की जरूरत बताई।
हिंदी को सरल और स्वाभाविक बनाने पर सचिव का जोर
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कार्यालयीन कामकाज में हिंदी का दायरा बढ़ाने के साथ-साथ इसकी भाषा को सरल, सहज और स्वाभाविक बनाना भी जरूरी है।

उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वयं हिंदी में काम करने को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, वरिष्ठ स्तर पर हिंदी के इस्तेमाल से मंत्रालय के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इसे अपने दैनिक कार्यों में अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
AI और तकनीक से भारतीय भाषाओं के अनुवाद पर चर्चा
बैठक में भारतीय भाषाओं में प्राप्त पत्रों और दस्तावेजों के हिंदी अनुवाद के लिए तकनीकी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित उपकरणों के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
सचिव ने कहा कि तकनीक के माध्यम से अनुवाद की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाया जा सकता है। हालांकि, अनुवाद की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित भारतीय भाषा के विशेषज्ञों से इसकी समीक्षा कराना भी जरूरी होगा।
उन्होंने भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान और उनके सहज इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
वेबसाइट और पोर्टल को द्विभाषी रखने पर जोर
मंत्रालय में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी संयुक्त सचिव राजेश कुमार सिंह ने बैठक में साझा की।
उन्होंने मंत्रालय की वेबसाइट और पोर्टल को द्विभाषी रखने, यूनिकोड आधारित कंप्यूटरों के इस्तेमाल और राजभाषा कार्यान्वयन समिति की नियमित बैठकों जैसी पहलों का उल्लेख किया।
इसके अलावा मंत्रालय में हिंदी कार्यशालाओं, प्रतियोगिताओं और हिंदी पखवाड़े जैसे कार्यक्रमों के आयोजन की जानकारी भी दी गई।
सोशल मीडिया और पंचायतों से संवाद में सरल हिंदी
बैठक में यह भी जोर दिया गया कि हिंदी का इस्तेमाल केवल फाइलों और कार्यालयीन दस्तावेजों तक सीमित न रहे। बैठकों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सोशल मीडिया और पंचायतों के साथ होने वाले संवाद में भी सरल और समझने योग्य हिंदी को प्राथमिकता देने की जरूरत है।
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राजेश कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों की ओर से दिए गए सुझाव और मार्गदर्शन मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।








