ग्रामीणों की इस पहल की क्षेत्र में चर्चा हो रही है। गांव के लोगों ने मिलकर आर्थिक सहयोग जुटाया और चिड़ी देवी के परिवार के प्रति अपना समर्थन जताया।
36 कौम के लोगों ने चिड़ी देवी को बनाया था प्रत्याशी
नागौर जिले की मुंडवा पंचायत समिति के अंतर्गत भदौरा ग्राम पंचायत के राजस्व गांव मोड़ी में ग्रामीणों ने साधारण परिवार से आने वाले हेमाराम राव की पत्नी चिड़ी देवी को सरपंच पद का प्रत्याशी बनाया था। गांव के विभिन्न समाजों के लोगों ने एकजुट होकर उनके समर्थन में प्रचार किया और मतदान भी किया।
हालांकि, चुनाव परिणाम चिड़ी देवी के पक्ष में नहीं आया। इसके बावजूद ग्रामीणों ने उनके परिवार को अकेला छोड़ने के बजाय सहयोग करने का फैसला किया।
गांव की सभा में जुटाए 25 लाख रुपये
चुनाव में हार के बाद गांव में एक सभा आयोजित की गई। इसमें विभिन्न समाजों के लोगों ने आपसी सहयोग से धनराशि एकत्रित की और हेमाराम राव के परिवार को सम्मानपूर्वक 25 लाख रुपये भेंट किए।
ग्रामीणों का उद्देश्य परिवार के प्रति अपना भरोसा और अपनापन जताने के साथ चुनाव के दौरान पड़े आर्थिक बोझ में मदद करना था। इस पहल ने चुनावी हार के बाद भी गांव की एकजुटता को सामने रखा।
हेमाराम राव बोले- गांव के प्यार ने निराशा को खुशी में बदला
ग्रामीणों से मिले इस सहयोग से हेमाराम राव भावुक हो गए। उन्होंने गांव के लोगों का आभार जताते हुए कहा कि सरपंच नहीं बन पाने का मलाल जरूर था, लेकिन ग्रामीणों के प्यार, विश्वास और सहयोग ने उनकी निराशा को खुशी और गर्व में बदल दिया।
उनके मुताबिक, पद और प्रतिष्ठा से कहीं बढ़कर पूरे गांव का साथ और अपनापन है। ग्रामीणों के इस कदम ने उनके परिवार को भावनात्मक संबल भी दिया।
नवनिर्वाचित वार्ड पंचों का भी हुआ सम्मान
कार्यक्रम के दौरान वार्ड नंबर 5 और 6 से नवनिर्वाचित वार्ड पंच सहदेवराम गोलिया और जगराम गोलिया को साफा पहनाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर गांव के विभिन्न समाजों के लोग मौजूद रहे।
मोड़ी गांव की पहल ने दिया भाईचारे का संदेश
मोड़ी गांव की यह घटना बताती है कि चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन सामाजिक रिश्ते इन नतीजों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। चुनावी मुकाबले के बाद भी यदि गांव के लोग किसी परिवार के साथ खड़े रहते हैं, तो यह सामाजिक एकता की मजबूत मिसाल बन जाता है।
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चिड़ी देवी सरपंच का चुनाव भले ही नहीं जीत सकीं, लेकिन ग्रामीणों के इस सहयोग ने उनके परिवार के प्रति गांव के विश्वास और सम्मान को जाहिर किया। यह पहल केवल 25 लाख रुपये की मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी भाईचारे और सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश भी देती है।









