इस योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास की योजना बनाने, सरकारी योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने में सक्षम बनाना है। यह पहल विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार की गई है। योजना पर कुल 7,395.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 4,869.48 करोड़ रुपये और राज्यों का हिस्सा 2,526.07 करोड़ रुपये होगा।
2.55 लाख से अधिक पंचायतों को मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के तहत देशभर की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों को शामिल किया जाएगा। योजना से लगभग 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ पंचायतों के अधिकारी-कर्मचारी और अन्य संबंधित हितधारक सीधे लाभान्वित होंगे।
इस योजना के माध्यम से पंचायतों की प्रशासनिक क्षमता, विकास योजनाओं के निर्माण, वित्तीय प्रबंधन और नागरिकों के साथ संवाद को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को प्राथमिकता देना और सरकारी संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।
योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी। उन क्षेत्रों के पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय निकायों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा, जहां संविधान के भाग IX के प्रावधानों के तहत सामान्य पंचायत व्यवस्था लागू नहीं है।
हर साल 2.55 लाख ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार करने का लक्ष्य
योजना के तहत प्रत्येक वर्ष कम से कम 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (GPDP) तैयार करने में सहायता दी जाएगी। इन योजनाओं को ई-ग्रामस्वराज पोर्टल के माध्यम से तैयार किया जाएगा।
इस प्रक्रिया में गांवों की स्थानीय प्राथमिकताओं, केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों की योजनाओं तथा उपलब्ध वित्तीय संसाधनों को एक साथ जोड़ने पर जोर रहेगा। इससे पंचायतों को यह समझने में मदद मिलेगी कि गांव में किन क्षेत्रों में विकास कार्यों की जरूरत है और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।
समग्र योजना तैयार करने के लिए विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं में बेहतर तालमेल स्थापित किया जाएगा। हालांकि, अलग-अलग सरकारी योजनाओं को लागू करने की मौजूदा विभागीय व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मिलेगी पंचायतों के विकास की जानकारी
PM VGSY के अंतर्गत ई-ग्रामस्वराज और मौजूदा ई-पंचायत प्रणालियों को आधार बनाकर पंचायत स्तर पर विकास से संबंधित जानकारियों को एक साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस प्लेटफॉर्म पर सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों, मिलने वाले लाभ, सामुदायिक परिसंपत्तियों और उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी जानकारी को एकीकृत करने का लक्ष्य है। इससे पंचायतों को विकास कार्यों में मौजूद कमियों की पहचान करने, स्थानीय जरूरतों को समझने और योजनाओं की निगरानी करने में सहायता मिलेगी।
डिजिटल व्यवस्था से पंचायतों के लिए विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करना आसान हो सकेगा। इससे स्थानीय विकास की योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन में समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है।
हर जागरूकता अभियान के जरिए 1 करोड़ लोगों तक पहुंचने का लक्ष्य
योजना के तहत सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय स्तर की विकास पहलों के बारे में ग्रामीण नागरिकों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रत्येक समन्वित जागरूकता अभियान के माध्यम से कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए मौजूदा डिजिटल प्लेटफॉर्म, जनसंपर्क माध्यमों, ग्राम सभाओं और पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी सरल भाषा में देना और गांवों के विकास से जुड़े विषयों पर उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
इस काम में PANCHAM नामक एआई आधारित बहुभाषी संवाद प्लेटफॉर्म की भी मदद ली जाएगी। यह प्लेटफॉर्म 17 भारतीय भाषाओं में दोतरफा संवाद की सुविधा प्रदान करता है। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय पहलों की जानकारी अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया जाएगा।
32 लाख पंचायत प्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर
PM VGSY के तहत लगभग 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और पंचायत से जुड़े अन्य लोगों की क्षमता निर्माण पर ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षण और डिजिटल माध्यमों से तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
प्रशिक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को समग्र विकास योजनाएं तैयार करने, सरकारी योजनाओं और वित्तीय संसाधनों की जानकारी समझने, नागरिकों के साथ संवाद स्थापित करने तथा विकास कार्यों की प्रगति पर नजर रखने में सक्षम बनाने का प्रयास होगा।
योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय स्तर पर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में काम करने के लिए मजबूत बनाना भी है। इससे पंचायतों को अपने क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार विकास की प्राथमिकताएं तय करने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन ऑडिट और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन को मिलेगा बढ़ावा
योजना के अंतर्गत हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाएं तैयार करने और संबंधित ऑडिट समय पर पूरा कराने में सहायता दी जाएगी। इसके लिए AuditOnline प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।
पंचायतों में बेहतर लेखांकन, वित्तीय विवरणों के सार्वजनिक खुलासे और अपने स्रोतों से राजस्व जुटाने की क्षमता को भी मजबूत किया जाएगा। अपने स्रोतों से प्राप्त राजस्व (Own Source Revenue-OSR) बढ़ाने पर जोर देने से पंचायतों को वित्तीय रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान और अन्य उपलब्ध धनराशि के उचित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए जवाबदेही बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। पारदर्शी लेखांकन और नियमित ऑडिट से पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
16वें वित्त आयोग के अनुदान का प्रभावी इस्तेमाल करने में मिलेगी मदद
योजना की पृष्ठभूमि में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का प्रभावी उपयोग भी महत्वपूर्ण है। 16वें वित्त आयोग ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए ग्रामीण स्थानीय निकायों को लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है।
PM VGSY के माध्यम से पंचायतों को इन संसाधनों, सरकारी योजनाओं और गांवों की स्थानीय जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायता मिलेगी। ग्राम सभाओं में चर्चा और सहभागी योजना निर्माण के जरिए स्थानीय लोगों की प्राथमिकताओं को विकास योजनाओं में शामिल करने पर जोर रहेगा।
इस व्यवस्था का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई विकास पहलों को गांवों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना है, ताकि उपलब्ध धनराशि का इस्तेमाल स्थानीय विकास के लिए अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से लागू होगी योजना
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के माध्यम से लागू किया जाएगा। इसके तहत राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी वार्षिक कार्ययोजनाएं प्रस्तुत करेंगे, जिनमें प्रस्तावित गतिविधियों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं का विवरण होगा।
इन कार्ययोजनाओं का मूल्यांकन और अनुमोदन निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार केंद्रीय सशक्त समिति द्वारा किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारें अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के अनुरूप कार्य करेंगी। योजना के क्रियान्वयन में समन्वय, तकनीकी सहायता, निगरानी और समीक्षा की व्यवस्था भी शामिल होगी।
योजना के अंतर्गत कोई स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा। हालांकि, जरूरत के अनुसार राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए संविदा पर मानव संसाधन नियुक्त किए जा सकते हैं।
गांवों में सुशासन और आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में पहल
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना का मुख्य उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय विकास की योजना बनाने और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में सक्षम बनाना है।
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समग्र ग्राम पंचायत विकास योजना, डिजिटल तकनीक, प्रशिक्षण, जनभागीदारी और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से पंचायतों की भूमिका मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने, सरकारी संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और जवाबदेह स्थानीय शासन व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।








