Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में नौ आतंकी ढांचों के खात्मे के बाद पाकिस्तान प्रायोजित प्रमुख आतंकी संगठन, खासकर जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिज्बुल मुजाहिदीन (Hizb), पाकिस्तान के अंदर गहराई में जाकर अफगानिस्तान सीमा के पास अपने ठिकाने शिफ्ट कर रहे हैं। खुफिया एजेंसियों को पुख्ता विजुअल सबूत मिले हैं कि दोनों संगठन अपने बेस को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (KPK) में स्थानांतरित कर रहे हैं।
जैश ने खैबर क्षेत्र के मनसेहरा में अपने प्रशिक्षण केंद्र मरकज शोहदा-ए-इस्लाम का तेजी से विस्तार करना शुरू कर दिया है। तस्वीरों में साइट पर निर्माण कार्य और रसद सामग्री में बढ़ोतरी की पुष्टि हुई है।
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बन रहा नया प्रशिक्षण केंद्र
दूसरी ओर, पूर्व एसएसजी कमांडो खालिद खान के नेतृत्व में हिज्ब ‘HM-313’ नामक नया प्रशिक्षण केंद्र बंदाई, KPK में बना रहा है। जमीन अगस्त 2024 में खरीदी गई थी, लेकिन निर्माण कार्य मई के मध्य से शुरू हुआ। तस्वीरों से पता चला है कि वहां की बाउंड्री वॉल और शुरुआती प्रशिक्षण ढांचा पूरा हो चुका है। ‘313’ का नामकरण बद्र गजवा (एक ऐतिहासिक इस्लामी युद्ध) और अल-कायदा की ब्रिगेड 313 को श्रद्धांजलि है, जो हिज्ब की वैश्विक जिहादी वैधता हासिल करने की मंशा को दर्शाता है।
25 सितंबर को जैश पेशावर के मरकज शहीद मकसूदाबाद में यूसुफ आज़हर (मसूद आज़हर का भाई, जो ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था) की याद में भर्ती अभियान चलाने वाला है। इसी दौरान संगठन का नया नाम ‘अल-मुराबितून’ (इस्लाम की भूमि के रक्षक), जो पश्चिम अफ्रीका के अल-कायदा ग्रुप जैसा है, घोषित किया जाएगा।
यह ठिकानों का बदलाव संगठनों की रणनीतिक अनुकूलन क्षमता को दर्शाता है, जो अब पारंपरिक ठिकानों को भारतीय सटीक हमलों के लिए असुरक्षित मानते हैं।
खुफिया नोट के अनुसार, KPK की भौगोलिक गहराई, अफगान सीमा की निकटता और अफगान युद्ध से जुड़े पुराने जिहादी ठिकानों की मौजूदगी इन्हें नया सुरक्षित ज़ोन बनाती है। यह पूरी गतिविधि पाकिस्तान की राज्य संरचनाओं की जानकारी और सुविधा से की जा रही है, जिसका सबूत है पुलिस सुरक्षा में आयोजित जैश की सभाएं और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) जैसे राजनीतिक-धार्मिक संगठनों की संलिप्तता।
अब KPK को जैश के रियर कमांड ज़ोन के तौर पर स्थापित किया जा रहा है, जबकि पीओके को घुसपैठ के लिए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।
खुफिया एजेंसियों ने 14 सितंबर को भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच शुरू होने से महज सात घंटे पहले मनसेहरा के गढ़ी हबीबुल्लाह में जैश द्वारा आयोजित जनभर्ती अभियान को चिन्हित किया है। यह आयोजन दिखावे में देवबंदी धार्मिक सभा था, लेकिन वास्तव में यह जैश और JUI का समन्वित मोबिलाइजेशन अभियान था। इस मौके पर जैश के KPK और कश्मीर प्रमुख मौलाना मुफ्ती मसूद इलियास कश्मीरी उर्फ अबू मोहम्मद मौजूद थे।
खुफिया अधिकारी ने बताया कि, ‘उनकी मौजूदगी, जहां जैश के कैडर M4 राइफलों से लैस थे और स्थानीय पुलिस अधिकारी, जिनमें गढ़ी हबीबुल्लाह थाने के इंस्पेक्टर लियाकत शाह भी शामिल थे, सुरक्षा दे रहे थे, पाकिस्तान की राज्य संलिप्तता और जैश की दुस्साहसी पुनर्जीवन रणनीति दोनों को उजागर करती है।’
करीब 30 मिनट तक कश्मीरी ने ओसामा बिन लादेन की शान में भाषण दिया, उन्हें शोहदा-ए-इस्लाम और “प्रिंस ऑफ अरब” बताया, जिससे जैश की विचारधारा को सीधा अल-कायदा की विरासत से जोड़ा गया।









