Agricultural Students Fellowship: देशभर में कृषि शिक्षा और शोध से जुड़े छात्रों के लिए केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था की शुरुआत की है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा कैंपस से NSP-DBT सिस्टम की औपचारिक शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य कृषि छात्रों को मिलने वाली स्कॉलरशिप और फेलोशिप की राशि समय पर सीधे उनके बैंक खातों तक पहुंचाना है।
सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था के तहत पहली किस्त के रूप में 21.35 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे देशभर के 6,000 से अधिक कृषि छात्रों को सीधे आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
कृषि छात्रों के खाते में सीधे पहुंचेगी फेलोशिप
NSP यानी National Scholarship Portal को DBT यानी Direct Benefit Transfer व्यवस्था से जोड़ने के बाद छात्रवृत्ति भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक सुव्यवस्थित बनाया गया है।
नई व्यवस्था में फेलोशिप की राशि सीधे पात्र छात्रों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। इससे कागजी प्रक्रिया और भुगतान में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर कहा कि छात्रों की पढ़ाई, प्रवेश और आर्थिक सहायता से जुड़ी प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी होनी चाहिए, ताकि आर्थिक कारणों से उनकी शिक्षा और शोध प्रभावित न हो।
पहली किस्त के लिए 21.35 करोड़ रुपये जारी
NSP-DBT सिस्टम के तहत पहली किस्त के रूप में 21.35 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है। इससे 6,000 से अधिक कृषि छात्रों को लाभ मिलने की बात कही गई है।
डिजिटल सिस्टम का एक प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थी तक पहुंचे। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने और प्रशासनिक देरी कम होने की उम्मीद है।
रिसर्च और पढ़ाई पर फोकस कर सकेंगे छात्र
कृषि क्षेत्र में पोस्टग्रेजुएट शिक्षा और रिसर्च करने वाले छात्रों के लिए समय पर मिलने वाली फेलोशिप काफी महत्वपूर्ण होती है। शोध कार्यों में प्रयोगशाला गतिविधियों, फील्ड ट्रायल और अन्य अकादमिक जरूरतों पर खर्च होता है।
समय पर आर्थिक सहायता मिलने से छात्रों को वित्तीय परेशानियों से कुछ राहत मिल सकती है और वे अपनी पढ़ाई तथा अनुसंधान पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
सरकार की इस पहल को कृषि शिक्षा और शोध व्यवस्था को डिजिटल रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
कृषि शिक्षा को खेतों से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के दौरान कृषि मंत्री ने केवल डिजिटल फेलोशिप व्यवस्था की बात नहीं की, बल्कि कृषि शिक्षा में व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि कृषि की पढ़ाई केवल कक्षा और किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। छात्रों को किसानों के बीच जाकर खेती की वास्तविक परिस्थितियों को समझना चाहिए। मिट्टी, फसल, उत्पादन और किसानों की रोजमर्रा की चुनौतियों से परिचित होकर छात्र ऐसी तकनीक और समाधान विकसित कर सकते हैं, जिनका वास्तविक लाभ कृषि क्षेत्र को मिले।
छात्रों को फील्ड एक्सपीरियंस देने की योजना
कृषि शिक्षा में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और फील्ड एक्सपोजर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को खेती की जमीनी समस्याओं से जोड़ना और उन्हें अनुसंधान को वास्तविक जरूरतों के अनुरूप विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
कृषि मंत्री ने किसानों और वैज्ञानिकों की भूमिका को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि देश की कृषि प्रगति में दोनों का महत्वपूर्ण योगदान है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए छात्रों से अपील
कार्यक्रम के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने ICAR के संस्थानों से जुड़े छात्रों से पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भागीदारी करने की अपील की। उन्होंने हरियाली अमावस्या के अवसर पर पौधारोपण और हरित वातावरण को बढ़ावा देने की बात कही।
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Agricultural Students Fellowship के तहत NSP और DBT को जोड़ने की पहल कृषि शिक्षा से जुड़े छात्रों के लिए महत्वपूर्ण डिजिटल बदलाव है। सीधे बैंक खाते में आर्थिक सहायता पहुंचाने की व्यवस्था से भुगतान प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। साथ ही, कृषि शिक्षा को फील्ड अनुभव, किसान और व्यावहारिक शोध से जोड़ने पर जोर युवाओं को कृषि क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों के करीब ले जा सकता है।









