लोकसभा में किसानों की आय और उनकी आर्थिक स्थिति को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया। सांसद एम.डी. अबू ताहेर खान ने सरकार से पूछा कि क्या किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल करने में सरकार असफल रही है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जानना चाहा कि बीते पांच वर्षों में कर्ज न चुका पाने के कारण किसानों की मौत के आंकड़े क्या हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कई योजनाओं और कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र के लिए बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2013-14 में जहां यह आवंटन लगभग 22 हजार करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 के लिए इसे बढ़ाकर 1.27 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है।
मंत्री ने यह भी बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा 75 हजार किसानों की सफलता की कहानियां संकलित की गई हैं, जिनमें विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से उनकी आय दोगुनी या उससे अधिक हुई है।
किसानों की आय में बढ़ोतरी के संकेत
सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वे में किसान परिवारों की औसत मासिक आय में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2012-13 में यह आय 6,426 रुपये थी, जो 2018-19 में बढ़कर 10,218 रुपये हो गई।
इसके अलावा, उपभोग व्यय के आंकड़े भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुधार का संकेत देते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति मासिक खर्च 2011-12 के 1,430 रुपये से बढ़कर 2023-24 में 4,122 रुपये हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2,630 रुपये से बढ़कर 6,996 रुपये तक पहुंच गया।
किसानों की आत्महत्या के आंकड़े
किसानों की मौत और आत्महत्या के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि इस तरह के आंकड़े सीधे कृषि मंत्रालय नहीं रखता। ये आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा संकलित किए जाते हैं, जो गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह ब्यूरो हर साल ‘भारत में आकस्मिक मृत्यु एवं आत्महत्या’ रिपोर्ट प्रकाशित करता है, जिसमें संबंधित आंकड़े उपलब्ध होते हैं।
मंत्री ने यह भी बताया कि प्रभावित परिवारों को राहत और अनुग्रह राशि देने की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है, जो अपने-अपने नियमों के अनुसार सहायता प्रदान करती हैं।
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इस चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयासों का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष इन दावों की वास्तविकता पर सवाल उठा रहा है। किसानों की आय, खर्च और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी राजनीतिक और नीतिगत बहस के केंद्र में बने रहने की संभावना है।









