सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कराने वाले लोकप्रिय शिक्षक और मोटिवेशनल स्पीकर अवध ओझा ने राजनीति से किनारा करने का फैसला ले लिया है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की ओर से पटपड़गंज सीट से उम्मीदवार रहे ओझा ने लगभग दस महीने बाद राजनीतिक पारी को विराम देने की घोषणा कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।
“राजनीति छोड़ना मेरा निजी निर्णय”—अवध ओझा
अपने संदेश में उन्होंने AAP नेतृत्व, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया। ओझा ने लिखा कि, “अरविंद, मनीष, संजय और आम आदमी पार्टी के सभी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का हृदय से धन्यवाद। आपने जो प्रेम और सम्मान दिया, उससे मैं सदैव ऋणी रहूंगा। राजनीति से संन्यास लेना मेरा निजी निर्णय है। अरविंद आप एक बहुत बड़े नेता हैं। पटपड़गंज के लोगों का विशेष आभार।”
अवध ओझा ने साफ किया कि उनका फैसला किसी असहमति का परिणाम नहीं है और राजनीति से दूर होने के बाद वह खुद को अधिक सहज और स्वतंत्र महसूस कर रहे हैं।

सोमनाथ भारती ने जताई नाराज़गी
ओझा के फैसले पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सोमनाथ भारती ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि राजनीति “क्षणिक प्रयासों का क्षेत्र नहीं है” और ओझा जैसे प्रभावशाली शख्स को इसमें आने से पहले दीर्घकालिक सोच अपनानी चाहिए थी।
भारती ने कहा, “आप जैसे परिपक्व व्यक्ति का इतनी जल्दी राजनीति से हटना सही नहीं। पार्टी ने कई अनुभवी कार्यकर्ताओं के बीच से आपको पटपड़गंज का टिकट इसलिए दिया कि आप लंबे समय तक संगठन के साथ काम करेंगे।”
“AAP आम लोगों के मुद्दे उठाने वाली इकलौती पार्टी”—भारती
सोमनाथ भारती ने आगे लिखा कि AAP उन कुछ पार्टियों में है जो शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर सबसे अधिक फोकस करती है। उन्होंने दावा किया कि पारंपरिक दल आम जनता की वास्तविक समस्याओं से दूर होते जा रहे हैं और इसी अंतर को पाटने की जिम्मेदारी AAP उठा रही है।
चुनाव में मिली थी हार
गौरतलब है कि अवध ओझा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले AAP का दामन थामा था। पार्टी ने उन्हें पटपड़गंज जैसे प्रतिष्ठित क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से वह धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति से दूरी बनाते दिख रहे थे।
फैसले से AAP में हलचल
ओझा का राजनीति छोड़ना AAP के लिए एक झटका माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी ने उन्हें एक संभावनाशील चेहरे के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश की थी। अब उनका संन्यास न केवल पार्टी की रणनीति बल्कि टिकट चयन पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
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अवध ओझा आगे क्या करेंगे, इस पर उन्होंने कोई संकेत नहीं दिया, लेकिन उनके समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि वह शिक्षा और मोटिवेशन के क्षेत्र में पहले की तरह सक्रिय रहेंगे।









