बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आरजेडी ने बड़ा राजनीतिक दावा करते हुए कहा कि जेडीयू में जल्द ही बड़ी टूट देखने को मिलेगी और करीब दो दर्जन विधायक पार्टी छोड़ सकते हैं।
आरजेडी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने दावा किया कि एसआईआर (स्पेशल इलेक्टोरल रिवीजन) के जरिए वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए गए, जिससे जेडीयू के विधायक खुद नाराज हैं। उन्होंने कहा कि हर विधानसभा क्षेत्र में 25-30 हजार वोट काटे गए, और इसका सीधा नुकसान जेडीयू विधायकों को होगा।
‘जेडीयू विधायक घबराए हुए हैं’
तिवारी ने कहा, “एसआईआर की प्रक्रिया ने गरीबों, वंचितों और शोषितों का वोटिंग अधिकार छीन लिया है। जेडीयू के विधायक ये सब देख रहे हैं और अंदर ही अंदर गुस्से में हैं। उन्हें समझ में आ गया है कि इस बार उनकी सीट खतरे में है। नीतीश कुमार को भी अपने विधायकों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, इसीलिए वे चुप्पी साधे हुए हैं।”
उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जेडीयू के कई विधायक महागठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं, क्योंकि चुनाव के बाद महागठबंधन की सरकार बनने की संभावना मजबूत हो रही है।
‘चुनाव आयोग बन गया है बीजेपी आयोग’
आरजेडी प्रवक्ता ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, लेकिन न तो इसकी स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही कारण बताया गया। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव आयोग सार्वजनिक रूप से यह क्यों नहीं बता रहा कि किन मतदाताओं के नाम हटाए गए और क्यों।
उन्होंने कहा, “अगर हिम्मत है तो चुनाव आयोग नामों की पूरी सूची जारी करे। ऐसा लग रहा है जैसे वह निष्पक्ष संस्था न होकर बीजेपी का एजेंट बन चुका है।”

जेडीयू का पलटवार – ‘आरजेडी अपनी पार्टी संभाले’
आरजेडी के आरोपों पर जेडीयू ने तीखा जवाब देते हुए उन्हें झूठ और भ्रम फैलाने वाला बताया। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, “आरजेडी को पहले अपने घर की चिंता करनी चाहिए। उनके यहां कोई भी नेता कब पार्टी छोड़ दे, यह तय नहीं है।”
उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान की सफलता से आरजेडी बौखला गई है और हार के डर से झूठे दावे कर रही है। “तेजस्वी यादव को यह तक नहीं पता कि उनका खुद का नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं, और उनकी पार्टी अनाप-शनाप बयान दे रही है।”
राजीव रंजन ने कहा कि बिहार की जनता इन खोखले बयानों से प्रभावित नहीं होने वाली। आरजेडी को हार स्वीकार कर लेनी चाहिए और गलतफहमी में जीना छोड़ देना चाहिए।
क्या कहता है सियासी विश्लेषण?
विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी साल में इस तरह के बयानबाज़ी आम बात है, लेकिन जेडीयू विधायकों की कथित नाराजगी यदि सच है, तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। हालांकि, अभी तक कोई भी विधायक खुलकर सामने नहीं आया है।
यह भी पढ़ें: मानेसर नगर निगम में बीजेपी को बड़ी जीत
बिहार चुनाव 2025 से पहले सियासी घमासान अपने चरम पर है। आरजेडी जहां जेडीयू में टूट की भविष्यवाणी कर रही है, वहीं जेडीयू इसे बौखलाहट बता रही है। आने वाले हफ्ते तय करेंगे कि यह महज सियासी बयानबाजी है या वाकई बिहार की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है।









