पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक साथ कई शहरों और कस्बों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हिंसक हमले हुए हैं। इन घटनाओं में लगभग 50 लोगों की मौत की खबर है, जिनमें कम से कम 17 सुरक्षाकर्मी शामिल बताए जा रहे हैं। हमलों की जिम्मेदारी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने ली है और संगठन ने दो कथित हमलावरों की तस्वीरें जारी करते हुए उनमें महिला फिदायीन की मौजूदगी का दावा किया है।
महिला हमलावरों को लेकर BLA का दावा
BLA के मुताबिक, जारी तस्वीरों में दिख रही एक महिला की पहचान 24 वर्षीय आसिफा मेंगल के रूप में की गई है, जो नुश्की क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। संगठन का कहना है कि उसने मजीद ब्रिगेड से जुड़ने के बाद आत्मघाती हमलावर बनने का निर्णय लिया था और नुश्की में एक सुरक्षा प्रतिष्ठान को निशाना बनाया। दूसरी कथित महिला हमलावर की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हो रहा है, जिसमें एक महिला हमले से पहले साथियों के साथ दिखाई देती है और पाकिस्तानी सरकार की आलोचना करती नजर आती है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कई इलाकों में एक साथ हिंसा
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हमले शुक्रवार रात शुरू होकर शनिवार तक चले। नुश्की, ग्वादर, चमन, हब, नसीराबाद और मकरान जैसे क्षेत्रों से गोलीबारी और विस्फोटों की सूचनाएं सामने आईं। सरकारी बयान के मुताबिक, हमलावर आम नागरिकों के कपड़ों में स्कूलों, बाजारों, बैंकों और अस्पतालों जैसे स्थानों में घुसे थे।
सुरक्षाबलों की जवाबी कार्रवाई
हमलों के बाद पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने व्यापक ऑपरेशन चलाया। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने बताया कि लगभग 40 घंटे तक चली कार्रवाई में 140 से अधिक आतंकियों को मार गिराने का दावा किया गया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहा कि इन घटनाओं में महिला हमलावर शामिल थीं। सेना का कहना है कि किसी भी शहर या महत्वपूर्ण ठिकाने पर आतंकियों को नियंत्रण नहीं करने दिया गया।
‘ब्लैक स्टॉर्म’ अभियान का जिक्र
BLA ने इन हमलों को अपने ‘हेरोफ’ या ‘ब्लैक स्टॉर्म’ अभियान का दूसरा चरण बताया है। संगठन लंबे समय से केंद्र सरकार के खिलाफ अधिक अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों में हिस्सेदारी की मांग करता रहा है।
सबसे बड़ा, लेकिन सबसे गरीब प्रांत
बलूचिस्तान क्षेत्रफल के लिहाज से पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक सूचकांकों में यह सबसे पिछड़ा माना जाता है। यहां वर्षों से अलगाववादी हिंसा और सुरक्षा अभियानों का सिलसिला जारी है, जिससे आम नागरिकों की जिंदगी और विकास कार्य प्रभावित होते रहे हैं।
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ताजा घटनाक्रम ने बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला फिदायीन को लेकर किए गए दावों और बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई के बीच आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर बनी रहेगी।









