बीएमसी चुनाव नतीजे: मुंबई महानगरपालिका चुनाव के नतीजों में कई चौंकाने वाले राजनीतिक संकेत सामने आए हैं। बीजेपी गठबंधन बहुमत की ओर बढ़ रही है। सबसे बड़ी खबर यह रही कि राष्ट्रवादी नेता नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक को हार का सामना करना पड़ा। कुर्ला वेस्ट वार्ड से कांग्रेस उम्मीदवार अशरफ आज़मी ने उन्हें शिकस्त दी, जिससे यह मुकाबला खासा चर्चा में आ गया।
AIMIM का मुंबई में सियासी उभार
इस चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने भी सभी को हैरान कर दिया। पार्टी ने मुंबई के तीन वार्डों में जीत दर्ज कर अपनी मौजूदगी मजबूत की है।
वार्ड 135 से इरशाद खान, वार्ड 134 से महजबीन अतीक अहमद और वार्ड 145 से खैरुनिसा हुसेन ने जीत हासिल की। इसे मुंबई की राजनीति में AIMIM के लिए अहम सफलता माना जा रहा है।
कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के लिए राहत और चुनौती
कांग्रेस को वार्ड नंबर 33 से बड़ी जीत मिली, जहां विधायक असलम शेख की बहन कमर जहां मोइन सिद्दकी ने बाजी मारी। इसके अलावा वार्ड 165 से अशरफ आज़मी और वार्ड 183 से आशा काले ने कांग्रेस के खाते में सीट जोड़ी।
शिवसेना (यूबीटी) को भी कुछ अहम वार्डों में कामयाबी मिली। वार्ड 32 से गीता भंडारी, वार्ड 60 से मेघना काकड़े और वार्ड 182 से मिलिंद वैद्य ने जीत दर्ज की।
भाजपा का मजबूत प्रदर्शन
भाजपा ने इस चुनाव में कई वार्डों में बढ़त बनाते हुए अपनी ताकत दिखाई। वार्ड 2 से तेजस्वी घोसालकर, वार्ड 19 से प्रकाश तावड़े, वार्ड 20 से दीपक तावड़े, वार्ड 36 से सिद्धार्थ शर्मा, वार्ड 50 से विक्रम राजपूत, वार्ड 87 से कृष्णा पारकर, वार्ड 103 से हेतल गाला, वार्ड 107 से नील किरीट सोमैया, वार्ड 157 से आशा तावड़े, वार्ड 207 से रोहिदास लोखंडे, वार्ड 214 से अजय पाटिल और वार्ड 215 से संतोष ढोले ने जीत हासिल की।
अन्य प्रमुख नतीजे
- वार्ड 51 से वर्षा टेंबेलकर (शिवसेना)
- वार्ड 123 से सुनील मोरे (यूबीटी)
- वार्ड 124 से शकीना शेख (यूबीटी)
- वार्ड 156 से अश्विनी माटेकर (शिवसेना)
- वार्ड 164 से शैला लांडे (शिवसेना)
- वार्ड 193 से हेमांगी वर्दिकर
- वार्ड 201 से इरम सिद्दीकी (अन्य)
- वार्ड 204 से अनिल कोकिड (शिवसेना)
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सियासी संकेत
बीएमसी चुनाव के ये नतीजे साफ संकेत देते हैं कि मुंबई की राजनीति अब और ज्यादा बहुकोणीय होती जा रही है। जहां भाजपा ने कई इलाकों में पकड़ मजबूत की है, वहीं AIMIM जैसी पार्टियों की एंट्री ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को नई चुनौती दी है। आने वाले दिनों में बीएमसी की सत्ता संरचना को लेकर सियासी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।









