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मुंबई का ‘मिनी सरकार’ बीएमसी को क्यों कहा जाता है?

मुंबई में नगर निगम चुनाव के नतीजों को लेकर सियासी हलचल चरम पर है। देश की आर्थिक राजधानी में होने वाला यह चुनाव सिर्फ पार्षदों के चयन तक सीमित नहीं रहता है।

Gautam Rishi by Gautam Rishi
16 January 2026
in राज्यों से
0
BMC बजट 2026-27: शिक्षा क्षेत्र के लिए 4,248 करोड़ रुपये की मंजूरी - Panchayati Times

बीएमसी (BMC)

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मुंबई में नगर निगम चुनाव के नतीजों को लेकर सियासी हलचल चरम पर है। देश की आर्थिक राजधानी में होने वाला यह चुनाव सिर्फ पार्षदों के चयन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसे सत्ता की बड़ी कसौटी माना जाता है। वजह साफ है—बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का दायरा और ताकत कई राज्यों की सरकारों से कम नहीं है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा से लेकर परिवहन तक, करोड़ों मुंबईकरों की रोजमर्रा की जिंदगी सीधे इसी संस्था के फैसलों से जुड़ी होती है।

क्यों सबसे अहम है बीएमसी चुनाव?

महाराष्ट्र की 29 नगरपालिकाओं के नतीजे सामने आ रहे हैं, लेकिन नजरें खासतौर पर बीएमसी पर टिकी हैं। 227 वार्डों के लिए हुए मतदान में लगभग 53 फीसदी वोट पड़े थे। मतगणना के लिए शहर में 23 केंद्र बनाए गए हैं। बीएमसी को देश की सबसे समृद्ध नगर निगम कहा जाता है, इसलिए यहां सत्ता में आना राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन जाता है।

150 साल पुरानी संस्था, आज भी उतनी ही प्रभावशाली

बीएमसी की स्थापना 1865 में हुई थी। समय के साथ यह सिर्फ नगर निगम न रहकर मुंबई की स्थानीय सरकार के रूप में विकसित हो गई। लंबे समय तक शिवसेना का यहां वर्चस्व रहा, लेकिन अब पार्टी के दो धड़ों में बंटने के बाद मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। यही वजह है कि 2026 का बीएमसी चुनाव राजनीतिक भविष्य तय करने वाला माना जा रहा है।

सड़कों से लेकर गड्ढों तक जिम्मेदारी बीएमसी की

मुंबई का करीब 2,000 किलोमीटर से ज्यादा का सड़क नेटवर्क बीएमसी के अधीन है। मानसून के दौरान गड्ढे हमेशा बड़ा मुद्दा रहे हैं। इसी समस्या से निपटने के लिए निगम सैकड़ों किलोमीटर सड़कों को सीमेंट कंक्रीट में बदलने की योजना पर काम कर रहा है, जिस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

सात झीलों से बुझती है मुंबई की प्यास

शहर की जलापूर्ति सात प्रमुख झीलों पर आधारित है, जिनका प्रबंधन बीएमसी करती है। पानी की शुद्धि, पाइपलाइन नेटवर्क, लीकेज की मरम्मत और बढ़ती आबादी के अनुसार सप्लाई बढ़ाना—ये सभी जिम्मेदारियां निगम के कंधों पर हैं।

कचरा, सफाई और सीवेज सिस्टम

मुंबई रोजाना हजारों टन कचरा पैदा करती है। इसे इकट्ठा करना, प्रोसेस करना और सुरक्षित तरीके से निपटान करना बीएमसी का काम है। इसके साथ ही सड़क सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी निगम ही संभालता है।

स्वास्थ्य और शिक्षा में बड़ी भूमिका

बीएमसी देश की सबसे बड़ी शहरी सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था चलाती है। मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से लेकर सामान्य और विशेष अस्पताल, डिस्पेंसरी और मातृत्व गृह इसी के अंतर्गत आते हैं। कोरोना महामारी के दौरान बीएमसी के काम की देशभर में सराहना हुई थी।
शिक्षा के क्षेत्र में भी निगम 1,100 से अधिक स्कूलों का संचालन करता है, जहां किफायती या मुफ्त शिक्षा के जरिए लाखों बच्चों को लाभ मिलता है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े प्रोजेक्ट

पुल, फ्लाईओवर, सबवे और लिंक रोड—मुंबई के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बीएमसी की अहम भूमिका है। हाल ही में शुरू हुई कोस्टल रोड परियोजना ने शहर के सफर को काफी आसान बनाया है। इसके अलावा कई नए लिंक रोड और कोस्टल प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है।

बस सेवा, पार्क और खुली जगहें

BEST बस सेवा की मूल जिम्मेदारी भी बीएमसी के पास है। हजारों बसों के संचालन के लिए निगम हर साल बड़ा बजट आवंटित करता है। साथ ही पार्किंग व्यवस्था, उद्यान और खुली जगहों की देखरेख भी बीएमसी ही करती है।

यह भी पढ़ें: पुरुष प्रेग्नेंट हो सकते हैं? भारतीय मूल की डॉक्टर और अमेरिकी सीनेटर आमने-सामने

बीएमसी चुनाव इसलिए खास है क्योंकि यह सिर्फ स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं, बल्कि मुंबई की ‘मिनी सरकार’ की बागडोर सौंपने का फैसला है। यही कारण है कि हर राजनीतिक दल इस मुकाबले को पूरी ताकत से लड़ रहा है और पूरे देश की नजरें मुंबई के नतीजों पर टिकी हैं।

Tags: बीएमसीमुंबई
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