अमेरिका में गर्भपात को लेकर चल रही बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है। इस बार मामला तब चर्चा में आया, जब अमेरिकी सीनेट की एक अहम सुनवाई के दौरान भारतीय मूल की जानी-मानी डॉक्टर और रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली के बीच जेंडर और बायोलॉजी को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। यह बहस इतनी बढ़ गई कि सुनवाई का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
किस मुद्दे पर हो रही थी सुनवाई?
यह सुनवाई वॉशिंगटन स्थित डर्कसेन सीनेट ऑफिस बिल्डिंग में सीनेट की स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और पेंशन समिति के तहत आयोजित की गई थी। इसका विषय था— “महिलाओं की सुरक्षा: केमिकल गर्भपात दवाओं के खतरों को उजागर करना”। इस दौरान भारतीय-अमेरिकी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा वर्मा को गवाह के रूप में बुलाया गया था।
अपने शुरुआती बयान में डॉ. वर्मा ने गर्भपात की दवाओं का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेडिकेशन एबॉर्शन पर दशकों से शोध हो रहा है और यह सुरक्षित व प्रभावी तरीका साबित हुआ है। डॉ. वर्मा के अनुसार, वर्ष 2000 में मंजूरी मिलने के बाद से अब तक अमेरिका में लाखों लोग इन दवाओं का इस्तेमाल कर चुके हैं और 100 से अधिक उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक अध्ययनों में इसकी सुरक्षा प्रमाणित हुई है।
सवाल जिसने बहस को भड़का दिया
सुनवाई के दौरान माहौल उस वक्त बदल गया, जब रिपब्लिकन सीनेटर जोश हॉली ने डॉ. वर्मा से अचानक सवाल किया— “क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?”
डॉ. वर्मा ने सीधे ‘हां’ या ‘न’ में जवाब देने के बजाय कहा कि वह ऐसे मरीजों का इलाज करती हैं जिनकी लैंगिक पहचान विविध होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा विज्ञान को मरीजों की जमीनी वास्तविकताओं और अनुभवों के संदर्भ में देखना चाहिए, न कि राजनीतिक नजरिए से।
सीधे जवाब पर अड़े सीनेटर हॉली
सीनेटर हॉली ने डॉक्टर के जवाब से असंतोष जताया और बार-बार सीधे उत्तर की मांग की। उन्होंने कहा कि उनका सवाल राजनीति नहीं बल्कि बायोलॉजी से जुड़ा है। हॉली का तर्क था कि वे एक मेडिकल एक्सपर्ट के रूप में डॉ. वर्मा की विश्वसनीयता परखना चाहते हैं।
इसके जवाब में डॉ. वर्मा ने कहा कि ऐसे सवाल अक्सर मरीजों की जटिल वास्तविकताओं को नजरअंदाज करते हैं और चिकित्सा जैसे संवेदनशील विषय को राजनीतिक बहस में बदल देते हैं।
“गर्भवती महिलाएं होती हैं, पुरुष नहीं”
बहस को और तेज करते हुए सीनेटर हॉली ने रिकॉर्ड पर कहा, “गर्भवती महिलाएं होती हैं, पुरुष नहीं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. वर्मा बुनियादी जैविक तथ्यों को स्वीकार नहीं कर रहीं, जिससे उनकी गवाही पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है। हॉली ने यह भी दावा किया कि गर्भपात की दवाओं से कई मामलों में गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं सामने आती हैं, जो आधिकारिक आंकड़ों से कहीं ज्यादा हैं। उनके मुताबिक यह सुनवाई महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी है।
डॉक्टर का जवाब और रुख
डॉ. निशा वर्मा ने अपने बचाव में कहा कि वह विज्ञान से भी निर्देशित हैं और अपने मरीजों के वास्तविक अनुभवों का प्रतिनिधित्व भी करती हैं। उन्होंने कहा कि ध्रुवीकरण वाली भाषा और ऐसे सवाल मूल मुद्दे से ध्यान भटकाते हैं, जबकि चिकित्सा का उद्देश्य मरीजों की भलाई होना चाहिए।
सुनवाई का अंत तीखे आरोपों के साथ
सुनवाई के अंत में सीनेटर हॉली ने डॉ. वर्मा के रुख को विज्ञान, जनविश्वास और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों के लिए नुकसानदेह बताया। उन्होंने कहा कि जैविक सच्चाइयों को स्वीकार करना कोई राजनीतिक ध्रुवीकरण नहीं, बल्कि विज्ञान और समाज के लिए जरूरी है।
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इस बहस ने एक बार फिर अमेरिका में गर्भपात, जेंडर पहचान और चिकित्सा विज्ञान को लेकर चल रहे गहरे वैचारिक मतभेदों को उजागर कर दिया है।









