महंगाई के इस दौर में जब रसोई का बजट लगातार बिगड़ रहा है, तब लोग ऐसे व्यवसाय की तलाश में हैं जो हर समय चलने वाला हो और जिसकी मांग कभी खत्म न हो। आटा चक्की का कारोबार इसी श्रेणी में आता है। गांव से लेकर कस्बों तक हर घर की रोजमर्रा की जरूरत होने के कारण इसकी डिमांड हमेशा बनी रहती है। यही वजह है कि अब किसान और छोटे उद्यमी कम पूंजी में आटा चक्की खोलकर अच्छी आमदनी की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हो, लेकिन सही प्लानिंग और मेहनत के साथ यही बिजनेस आगे चलकर मजबूत कमाई का साधन बन सकता है। खास बात यह है कि सरकार भी माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को बढ़ावा दे रही है, जिससे इस कारोबार को शुरू करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है।
सरकारी योजना से मिलेगा बड़ा सहारा
गांव में आटा चक्की शुरू करने वालों के लिए प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का औपचारिकीकरण मिशन (PMFME योजना) एक बड़ी मदद साबित हो रही है। इस योजना के तहत किसान, छोटे कारोबारी और अन्य पात्र लोग आवेदन कर सकते हैं। उद्यानिकी विभाग के मुताबिक, इस स्कीम का मकसद छोटे फूड प्रोसेसिंग कारोबार को संगठित करना और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
इस योजना में आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इच्छुक लोग MyScheme पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। PMFME योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ट्रेनिंग, मार्केटिंग सपोर्ट और ब्रांडिंग जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। अगर आप आटा पैक करके बाजार में बेचने की योजना बना रहे हैं, तो सरकार इस दिशा में भी सहयोग देती है।
कितनी होगी शुरुआती लागत?
अगर खर्च की बात करें तो गांव में एक छोटी आटा चक्की लगभग 50 हजार रुपये में शुरू की जा सकती है। इस बजट में बेसिक मशीन, मोटर और बिजली कनेक्शन शामिल होते हैं। वहीं अगर आप थोड़ा बड़ा और बेहतर सेटअप लगाना चाहते हैं, तो 1 से 2 लाख रुपये में अच्छी क्वालिटी की मशीन और पैकिंग यूनिट भी लगाई जा सकती है।
PMFME योजना के तहत पात्र प्रोजेक्ट लागत का 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है। इसमें प्रति यूनिट अधिकतम सब्सिडी सीमा 10 लाख रुपये तय की गई है। उदाहरण के तौर पर, अगर आपकी यूनिट की कुल लागत 2 लाख रुपये है, तो आपको करीब 70 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।
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धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं कारोबार
इस बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे छोटे स्तर से शुरू कर धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है। शुरुआत में कम मशीनरी से काम शुरू कर बाद में मशीन अपग्रेड की जा सकती है। सरकारी सब्सिडी और बढ़ती डिमांड के चलते आटा चक्की का व्यवसाय गांवों में रोजगार और आय दोनों का मजबूत जरिया बन सकता है।









