टीम इंडिया के उभरते सितारे रिंकू सिंह को अंडरवर्ल्ड के नाम पर 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगे जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह धमकी ईमेल त्रिनिदाद और टोबैगो से भेजा गया था। आरोपी की पहचान मोहम्मद दिलशाद नौशाद के रूप में हुई है, जिसे मुंबई पुलिस ने इंटरपोल और विदेश मंत्रालय की मदद से भारत लाकर गिरफ्तार कर लिया है।
ज़ीशान सिद्दीकी को मिली थी जान से मारने की धमकी
यह मामला तब उजागर हुआ जब अप्रैल 2025 में एनसीपी नेता और पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी के बेटे और विधायक ज़ीशान सिद्दीकी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकी दी गई है। धमकी में लिखा गया था कि अगर उन्होंने मांगी गई रकम नहीं दी, तो उनका हाल भी उनके पिता जैसा होगा।
रिंकू सिंह के इवेंट मैनेजर को भी भेजा धमकी भरा ईमेल
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी ने न केवल ज़ीशान सिद्दीकी को, बल्कि भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के इवेंट मैनेजर को भी धमकी भरा ईमेल भेजा था। आरोपी ने खुद को दाऊद इब्राहिम के गिरोह D-कंपनी का सदस्य बताया और दोनों मामलों में 10-10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी। ईमेल में फिरौती न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी।

साइबर एक्सपर्ट निकला आरोपी, पुलिस को गुमराह करने की कोशिश
पुलिस के अनुसार, आरोपी दिलशाद पेशे से साइबर तकनीक का जानकार है और उसने अपनी पहचान छुपाते हुए विदेश से ईमेल भेजे। खास बात यह है कि उसने जानबूझकर ईमेल में लॉरेंस बिश्नोई का नाम क्लीन करने की कोशिश की, ताकि जांच एजेंसियां भ्रमित हो जाएं। पुलिस को संदेह है कि आरोपी देश के प्रभावशाली लोगों को निशाना बनाकर अपनी पहचान और मंशा छुपाना चाहता था।
इंटरपोल की मदद से हुई गिरफ्तारी
मुंबई पुलिस ने तकनीकी जांच के जरिए पता लगाया कि धमकी भरे ईमेल का IP एड्रेस त्रिनिदाद और टोबैगो का है। इसके बाद इंटरपोल के सहयोग से आरोपी को लुक आउट सर्कुलर (LOC) के तहत वहां से भारत लाया गया। जैसे ही वह छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।
रिंकू सिंह से नहीं हुई सीधी बात, मैनेजर को भेजा गया था मेल
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने रिंकू सिंह से प्रत्यक्ष रूप से संपर्क नहीं किया, बल्कि उनके इवेंट मैनेजर को टारगेट करते हुए धमकी दी। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी अकेले काम कर रहा था या किसी बड़े नेटवर्क या गैंग का हिस्सा था।
पुलिस का बयान: गैंग से नहीं, मौके का फायदा उठाने की कोशिश
मुंबई पुलिस ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि आरोपी का किसी भी सक्रिय गैंग से कोई संबंध नहीं है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि वह केवल D-कंपनी के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को डराकर पैसे ऐंठना चाहता था।
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इस घटना ने यह संकेत दिया है कि अब साइबर धमकी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों में भी अपराधी नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। हालांकि मुंबई पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा अपराध टल गया। अब देखना होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।









