संसद के मानसून सत्र के दौरान ऑपरेशन सिंदूर पर चल रही चर्चा ने सोमवार को उस वक्त तूल पकड़ लिया जब कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने विपक्ष की ओर से बोलते हुए सरकार की नीति, रणनीति और जवाबदेही पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को अधूरा बताते हुए कहा कि सरकार को न केवल ऑपरेशन की सफलता पर, बल्कि उसके पीछे की चूक और जवाबदेही पर भी स्पष्टता लानी चाहिए।
गौरव गोगोई ने सवाल किया कि बैसरन में आतंकवादी कैसे पहुंचे, और 26 निर्दोष लोगों की हत्या करने में उन्हें किसने मदद की। उन्होंने कहा, “यह जानना देश का हक है कि पांच आतंकवादी इतने संवेदनशील क्षेत्र में दाखिल कैसे हुए और सौ दिन बाद भी वे फरार क्यों हैं। सरकार उनके बच निकलने की जिम्मेदारी किस पर डाल रही है?”
सिर्फ ऑपरेशन की सफलता नहीं, चूक की भी हो जांच
कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को अपनी पीठ थपथपाने से पहले पहलगाम हमले की विफलता की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लेते हुए कहा कि “आप कहते हैं आतंकियों की कमर तोड़ दी, लेकिन फिर भी पुलवामा होता है। आप एलजी के पीछे नहीं छिप सकते।”
उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब में थे, लेकिन देश की त्रासदी के समय पहलगाम नहीं पहुंचे और चुनावी भाषणों में व्यस्त रहे। “राहुल गांधी ही हैं जो पहलगाम की शहादतों की बात करते हैं,” उन्होंने कहा।
सरकार ऑपरेशन रोकने की वजह स्पष्ट करे
गौरव गोगोई ने सवाल उठाया कि जब ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था और भारत का मनोबल ऊंचा था, तो 10 मई को अचानक सीजफायर क्यों किया गया? “क्या पाकिस्तान वास्तव में घुटने टेक रहा था, या भारत किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव में झुका?” उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे का हवाला देते हुए कहा कि “ट्रंप कह चुके हैं कि हमने युद्ध रुकवाया। ऐसे में सरकार को देश के सामने सच्चाई रखनी चाहिए।”
चीन को क्यों नहीं किया गया संबोधित?
कांग्रेस नेता ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह चीन के साथ सख्ती का दावा करती है, लेकिन रक्षा मंत्री के बयान में चीन का जिक्र तक नहीं किया गया। “सिक्किम में जाकर खुद एलजी राहुल आर सिंह कह चुके हैं कि पाकिस्तान को चीन का पूरा समर्थन है। क्या आप इसे नज़रअंदाज कर रहे हैं?”

उन्होंने कहा कि सेना खुद तीन फ्रंट पर युद्ध की संभावना जता चुकी है, जबकि सरकार अब तक दो मोर्चों की भी खुलकर समीक्षा नहीं कर पा रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्ष ने समय-समय पर चेतावनी दी थी, लेकिन सरकार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
विदेश नीति पर उठे सवाल
गौरव गोगोई ने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ब्राजील जैसे परंपरागत मित्र देश भी जम्मू-कश्मीर को लेकर नरम रुख अपना रहे हैं। “आप जिन देशों को मित्र कहते हैं, उन्हीं के ड्राफ्ट में पाकिस्तान की निंदा नहीं होती और आपको उसमें भी सफलता दिखती है,” उन्होंने तंज कसा।
सदन में हंगामा, स्पीकर की चेतावनी
गौरव गोगोई के तीखे और आलोचनात्मक भाषण के दौरान सत्ता पक्ष की ओर से लगातार विरोध हुआ। स्पीकर ने गोगोई को कुछ बयानों पर तथ्यात्मक स्पष्टता देने की नसीहत भी दी। हालांकि गोगोई अपने रुख पर कायम रहे और सरकार से पारदर्शिता की मांग करते रहे।
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संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक ओर जहां सरकार इसे सैन्य सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है, वहीं विपक्ष इससे जुड़ी चूकों, रणनीतिक निर्णयों और विदेश नीति को लेकर सरकार की आलोचना कर रहा है। गौरव गोगोई के तीखे सवालों ने यह साफ कर दिया है कि इस बहस का दायरा अब सिर्फ ऑपरेशन तक सीमित नहीं, बल्कि इससे जुड़े हर पहलू की राजनीतिक और रणनीतिक समीक्षा की मांग जोर पकड़ रही है।









