लोकसभा में सोमवार को बहुचर्चित ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत हो गई। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में खड़े होकर भारतीय सेना के साहस और रणनीतिक सफलता की जमकर तारीफ की। उन्होंने इस ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई को ‘सिंदूर की लाली’ करार दिया और कहा कि यह सिर्फ एक सैन्य ऑपरेशन नहीं, बल्कि भारत के आत्मसम्मान और सुरक्षा की रक्षा की कहानी है।
राजनाथ सिंह ने कहा, “6-7 मई की रात भारतीय सेना ने एक साहसिक और निर्णायक ऑपरेशन को अंजाम दिया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में निर्दोष लोगों को धर्म पूछकर मारा गया, जो अमानवीयता का सबसे घिनौना रूप था। इसके बाद प्रधानमंत्री ने तीनों सेनाध्यक्षों के साथ बैठक की और उन्हें पूरी छूट दी। सेना ने आतंकियों को उनके ठिकानों में घुसकर खत्म किया।”
सौ से अधिक आतंकी मारे गए
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस कार्रवाई में सौ से अधिक आतंकवादी और उनके हैंडलर मारे गए हैं। उन्होंने कहा, “बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं, इस ऑपरेशन में मृतकों की संख्या सौ से अधिक है, लेकिन हम आंकड़ों को लेकर अतिरेक नहीं दिखाना चाहते।”
पाकिस्तान की ‘टेरर नर्सरी’ पर सीधा प्रहार
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर युद्ध नहीं था, बल्कि आतंक के खिलाफ लक्षित कार्रवाई थी। “हमने सिर्फ उन्हीं ठिकानों को निशाना बनाया, जो भारत के खिलाफ साजिश रचने और आतंकवाद को बढ़ावा देने में सीधे तौर पर शामिल थे। भारत ने किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने तय लक्ष्यों को प्राप्त करने के बाद कार्रवाई रोकी,” उन्होंने कहा।

पाकिस्तान की हार सिर्फ सैन्य नहीं, मनोबल की भी थी
10 मई की सुबह भारतीय वायुसेना की जवाबी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान की ओर से डीजीएमओ स्तर पर संपर्क किया गया और तत्काल ऑपरेशन रोकने की अपील की गई। राजनाथ सिंह ने बताया कि भारत ने यह कार्रवाई केवल ‘पॉज़’ की है। “अगर पाकिस्तान फिर से कोई हरकत करता है, तो ऑपरेशन सिंदूर दोबारा शुरू किया जाएगा,” उन्होंने चेतावनी दी।
विपक्ष पर भी बोला हमला
रक्षा मंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि वे गलत प्रश्न पूछ रहे हैं। “वे यह पूछ रहे हैं कि हमारे कितने विमान गिरे, लेकिन कभी यह नहीं पूछा कि दुश्मन के कितने विमान हमने गिराए। अगर सवाल करना ही है, तो यह पूछिए कि ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा या नहीं – और इसका जवाब है, हां, यह पूरी तरह सफल रहा।”
राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि देश की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते समय राजनीति को एक सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने 1962 और 1971 की ऐतिहासिक घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे विपक्ष ने तब भी देशहित को प्राथमिकता दी थी।
भारत की नीति – पड़ोसी से मित्रता, आतंक से सख्ती
राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि भारत हमेशा अपने पड़ोसी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का पक्षधर रहा है, लेकिन जब बात आतंकवाद की आती है, तो भारत किसी भी हद तक जाकर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। “यह ऑपरेशन किसी देश के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंक के खिलाफ था,” उन्होंने दोहराया।
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ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में हुई यह चर्चा भारत की नई सुरक्षा नीति की झलक है – जहां हर हमले का जवाब निर्णायक, प्रभावी और सीमित लक्ष्य के साथ दिया जाएगा। राजनाथ सिंह की टिप्पणी न सिर्फ सेना के शौर्य को सलाम थी, बल्कि देशवासियों को यह भरोसा भी दिलाने की कोशिश थी कि अब भारत अपने हर सिंदूर की कीमत जानता है – और उस पर कोई आंच नहीं आने देगा।









