दिल्ली में विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र की मौत के विरोध में प्रदर्शन किया। VHP के कार्यकर्ता बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर एकत्र हुए और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। इस घटना के बाद बांग्लादेश में रह रहे भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से मेडिकल छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं सामने आ रही हैं।
भारतीय हाई कमिश्नर को बांग्लादेश ने किया तलब
इसी बीच बांग्लादेश सरकार ने भारत के हाई कमिश्नर प्रणय वर्मा को मंगलवार सुबह विदेश मंत्रालय में तलब किया। इस बैठक में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर भी मौजूद रहे। बांग्लादेश के विदेश सचिव असद अल सियाम ने भारत में बांग्लादेशी मिशनों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई और सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करने का अनुरोध किया।
सूत्रों के अनुसार, यह तलब भारत के विभिन्न हिस्सों में बांग्लादेशी दूतावासों और मिशनों के आसपास हालिया प्रदर्शनों के मद्देनज़र किया गया। इससे पहले 14 दिसंबर को भी प्रणय वर्मा को बुलाया गया था, जब बांग्लादेश ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयानों और एक अन्य मामले में सहयोग को लेकर भारत से चर्चा की थी।
पहले भी हो चुका है प्रदर्शन
बांग्लादेश में हुई इस घटना के विरोध में 20 दिसंबर को भी दिल्ली में बांग्लादेश हाई कमीशन के बाहर एक छोटा प्रदर्शन हुआ था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने उस समय स्पष्ट किया था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और इससे किसी तरह की सुरक्षा समस्या उत्पन्न नहीं हुई थी। उनके अनुसार, इसमें सीमित संख्या में लोग शामिल थे।
ढाका में भी उठी न्याय की मांग
22 दिसंबर को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में नेशनल प्रेस क्लब के सामने हिंदू संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों ने दीपू की मौत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि दीपू पर लगाए गए आरोप गलत थे और उसके साथ अन्याय हुआ। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की।
फैक्ट्री विवाद से जुड़ा मामला
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 वर्षीय दीपू चंद्र एक गारमेंट फैक्ट्री में कार्यरत थे और हाल ही में प्रमोशन से जुड़ी प्रक्रिया में शामिल हुए थे। बताया गया कि फैक्ट्री में कामकाज से जुड़े विवाद के दौरान कुछ कर्मचारियों के साथ उनका तनाव बढ़ गया। 18 दिसंबर को विवाद गंभीर हो गया और इसके बाद हालात बिगड़ते चले गए। परिजनों का आरोप है कि दीपू को सुरक्षा नहीं मिल सकी और बाद में उनकी मौत की सूचना मिली।
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बढ़ती सियासी और कूटनीतिक हलचल
इस घटना ने भारत और बांग्लादेश दोनों देशों में राजनीतिक और कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है। एक ओर दिल्ली में संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ढाका में भी न्याय और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग उठ रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।









