संसद में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद रमाशंकर राजभर ने सरकार की नीति, विदेश संबंधों और आतंकी घटनाओं पर तीखे सवाल उठाते हुए विपक्ष की ओर से मुखर पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि देश की असली प्राथमिकता जवान की सीमा, किसान का खेत और गरीब का पेट सुरक्षित करना होनी चाहिए — और इसी पर सरकार को नीति बनानी चाहिए।
सांसद ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा सौ आतंकियों को मारने के दावे का स्वागत करते हुए कहा कि अगर यह सच है, तो यह सराहनीय है। लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि पहलगाम हमले में शामिल चार आतंकियों का क्या हुआ? “घटना 22 अप्रैल को हुई, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर 17 दिन बाद शुरू हुआ और तीन दिन में समाप्त हो गया। ऐसे में जनता के मन में यह सवाल है कि क्या यह समय पर हुआ?”
विश्वगुरु का भ्रम टूटा, ट्रंप ने युद्धविराम का दावा किया
राजभर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि हम जिसे “विश्वगुरु” मानते रहे, असल में तो “वॉशिंगटन में बैठा शख्स निर्णय ले रहा था।” उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम अमेरिका ने कराया था।
राजभर ने कटाक्ष किया, “ट्रंप ने 26 बार कहा कि हमने युद्धविराम कराया। उन्होंने यहां तक कहा कि हमने न्यूक्लियर युद्ध रोकने के लिए भारत को बिजनेस डील ऑफर की। अगर यह सही है तो सवाल उठता है — क्या भारत अब अपने फैसले खुद नहीं लेता?”
भारत की कूटनीति नाकाम, पाकिस्तान को अलग-थलग करने में असफलता
सपा सांसद ने भारत की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने पाकिस्तान को IMF लोन दिलाने में मदद की, वहीं ट्रंप ने ISI चीफ की मेजबानी की। “जब हमारे प्रधानमंत्री अमेरिका से इतने घनिष्ठ रिश्ते रखते हैं, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों से अलग-थलग क्यों नहीं किया जा सका?”
उन्होंने क्वॉड जैसे मंचों पर भी टिप्पणी की और कहा कि भारत इन मंचों पर अमेरिका की सैन्य नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय वैधता देने में सहयोगी बन गया है, जबकि असली नेतृत्व भारत के हाथ में होना चाहिए।
तीन महीने बाद एलजी बोले – चूक हो गई, आतंकी अब तक क्यों नहीं पकड़े गए?
सांसद ने पहलगाम हमले के बाद सुरक्षा चूक को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन पर सवाल उठाए। “तीन महीने बाद एलजी कहते हैं कि चूक हो गई। सवाल है – आतंकियों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया? घटना के समय सुरक्षाबलों की मौजूदगी क्यों नहीं थी?”

भारत ने हमेशा तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को नकारा है – फिर ट्रंप की बातों में सच्चाई क्यों दिख रही है?
राजभर ने भारत की कूटनीतिक स्थिति पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाया। “अगर हम कहते हैं कि कोई तीसरा पक्ष हमारे द्विपक्षीय मसलों में दखल नहीं दे सकता, तो ट्रंप के बयान क्यों भारत की भूमिका को चुनौती देते हैं? या तो ट्रंप झूठ बोल रहे हैं या सरकार कुछ छिपा रही है। भारत की जनता को सच्चाई जानने का हक है।”
अगर ऑपरेशन सिंदूर सही था, तो फिर हम 32 देशों में क्यों गए?
सांसद ने यह भी पूछा कि अगर भारत का ऑपरेशन सिंदूर इतना कारगर था, तो फिर सरकार को दुनिया के 32 देशों में जाकर समर्थन क्यों जुटाना पड़ा? “अगर गए, तो क्या लाभ हुआ? कूटनीति को लेकर भी जनता को जवाब चाहिए।”
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रमाशंकर राजभर का भाषण इस बात का संकेत था कि विपक्ष सिर्फ सैन्य सफलता नहीं, बल्कि उसकी समयबद्धता, कूटनीतिक पृष्ठभूमि और जवाबदेही पर भी सरकार से स्पष्टता चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देशभक्ति सवाल पूछने से नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने से मजबूत होती है।









