हरदोई जिले के नघेटा रोड स्थित एक निजी बच्चों के अस्पताल में बुधवार शाम भीषण आग लग गई, जिससे पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हादसे के वक्त अस्पताल में भर्ती करीब दो दर्जन मासूम बच्चे और उनके तीमारदार खतरे में फंस गए थे। राहत की बात यह रही कि दमकल विभाग की तत्परता और स्थानीय लोगों की साहसिक मदद से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
बेसमेंट से उठा धुआं बना जानलेवा संकट
यह घटना बुधवार शाम लगभग 4 बजे की है, जब अस्पताल के बेसमेंट में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। बताया जा रहा है कि यहां बैटरियां और इलेक्ट्रिक उपकरण रखे गए थे, जिनमें विस्फोट जैसी स्थिति बन गई। आग से उठे घने धुएं ने ऊपरी मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया और पूरा अस्पताल कुछ ही मिनटों में गैस चैंबर जैसा बन गया।
सीढ़ियों, खिड़कियों और धोती की रस्सी से किया गया रेस्क्यू
आग लगते ही अस्पताल के नीचे मौजूद लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन पहली और दूसरी मंजिल पर मौजूद मरीजों और तीमारदारों को निकालने में मुश्किलें आईं। स्थानीय लोगों और स्टाफ ने धोती की रस्सी बनाकर, खिड़कियों और सीढ़ियों से बच्चों को बाहर निकाला। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था, परंतु साहसिक प्रयासों से एक बड़ा हादसा टल गया।

गंभीर बच्चों को दूसरे अस्पताल में किया गया शिफ्ट
अस्पताल की ओर से अपर्णा गुप्ता ने जानकारी दी कि हादसे के समय अस्पताल में 17–18 बच्चे भर्ती थे, जिनमें कुछ ऑक्सीजन सपोर्ट पर भी थे। सभी को प्राथमिकता से सुरक्षित बाहर निकाला गया। गंभीर बच्चों को तत्काल निर्मल नर्सिंग होम में शिफ्ट किया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई, कोई जनहानि नहीं
अग्निशमन अधिकारी महेश प्रताप सिंह ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलते ही फायर टेंडर को तत्काल मौके पर भेजा गया। टीम ने कुछ ही समय में आग पर काबू पा लिया। कोई जनहानि नहीं हुई है और सभी बच्चे सुरक्षित हैं।
फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की आग से सुरक्षा (फायर सेफ्टी) व्यवस्था की पोल खोल दी है। अस्पताल में अग्निशमन यंत्र मौजूद नहीं थे या चालू हालत में नहीं थे। अपर्णा गुप्ता ने भी माना कि बिजली चालू होने और अत्यधिक धुएं की वजह से आग बुझाने में कठिनाई आई। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब अस्पताल में छोटे बच्चों का इलाज हो रहा हो।
जांच जारी, आग के कारणों का पता लगाया जा रहा
हालांकि आग पर नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन दमकल विभाग की टीम अभी भी मौके पर मौजूद है और आग लगने के कारणों की गहन जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है।
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हरदोई की यह घटना जहां एक ओर समय पर कार्रवाई से एक बड़े हादसे को टलने की मिसाल बनी, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी खड़े करती है कि बच्चों जैसे संवेदनशील अस्पतालों में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतज़ाम क्यों नहीं होते? इस हादसे से सबक लेने की ज़रूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।









