केंद्र सरकार ने ग्रामीण भारत के विकास को गति देने के उद्देश्य से गुजरात और हरियाणा राज्यों को पंद्रहवें वित्त आयोग (XV-FC) की सिफारिशों के तहत वित्तीय सहायता जारी कर दी है। यह सहायता ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies – RLBs) को स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदान की जा रही है।
गुजरात को ₹522.20 करोड़ की बड़ी सहायता
गुजरात में, वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए ₹522.20 करोड़ की असंबद्ध (अनटाइड) अनुदान की दूसरी किस्त जारी की गई है। इस राशि का वितरण राज्य की सभी 38 ज़िला पंचायतों, 247 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 14,547 ग्राम पंचायतों के बीच किया जाएगा।
इसके अलावा, मुक्त अनुदान की पहली किस्त के रोके गए हिस्से ₹13.5989 करोड़ को भी अब जारी कर दिया गया है, जिससे 6 ज़िला पंचायतों, 5 ब्लॉक पंचायतों और 78 ग्राम पंचायतों को अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी।
हरियाणा को ₹195.129 करोड़ की पहली किस्त
हरियाणा के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के अंतर्गत ₹195.129 करोड़ की मुक्त अनुदान (Un-tied Grant) की पहली किस्त जारी की गई है। यह सहायता राज्य की 18 जिला पंचायतों, 134 पात्र ब्लॉक पंचायतों और 6,164 ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए दी गई है।
अनुदानों का उद्देश्य और उपयोग
भारत सरकार की ओर से यह सहायता पंचायती राज मंत्रालय और जल शक्ति मंत्रालय (पेयजल एवं स्वच्छता विभाग) की अनुशंसा पर दी जाती है। इन अनुदानों को वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष में दो किस्तों में जारी किया जाता है।
मुक्त (Un-tied) अनुदान:
- इसका उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकता है।
- इसका उपयोग संविधान की ग्यारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 29 विषयों से संबंधित विकास कार्यों के लिए होगा।
- वेतन और स्थापना व्यय पर इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
(Tied) अनुदान:
इनका उपयोग निम्नलिखित दो प्राथमिक क्षेत्रों में किया जाएगा:
- स्वच्छता एवं ODF (खुले में शौच से मुक्ति) की स्थिति बनाए रखने से जुड़ी सेवाएं – इसमें घरेलू कचरा प्रबंधन, विशेषकर मानव मल और मल-प्रबंधन शामिल हैं।
- पेयजल आपूर्ति, वर्षा जल संचयन, और जल पुनर्चक्रण जैसी योजनाएं।
विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस वित्तीय सहायता के माध्यम से गुजरात और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा, पेयजल, स्वच्छता, और स्थानीय विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इससे ग्राम पंचायतों की स्वायत्तता को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे वे अपनी स्थान-विशिष्ट जरूरतों के अनुसार योजनाएं बना सकेंगी और क्रियान्वित कर सकेंगी।
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पंद्रहवें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत जारी ये अनुदान देश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास और स्वच्छता मिशनों को मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। गुजरात और हरियाणा की ग्राम पंचायतों को मिली इस आर्थिक संजीवनी से ग्राम स्वराज और आत्मनिर्भर गांवों के लक्ष्य को गति मिलने की संभावना है।








