Hydrogen bomb Rahul Gandhi: वोट चोरी के आरोपों के बीच राहुल गांधी गुरुवार को एक स्पेशल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने जा रहे हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर निमंत्रण भेजते हुए लिखा, ‘कल, 18 सितंबर, लोकसभा में विपक्ष के नेता श्री राहुल गांधी द्वारा विशेष प्रेस ब्रीफिंग सुबह 10 बजे इंदिरा भवन ऑडिटोरियम में।’
यह तब हो रहा है जब राहुल ने भारतीय जनता पार्टी को कथित ‘वोट चोरी’ के दावे पर एक नए खुलासे की चेतावनी दी थी, यह कहते हुए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘अपना चेहरा जनता को नहीं दिखा पाएंगे जब हम ‘वोट चोरी’ का हाइड्रोजन बम लेकर आएंगे।’
उन्होंने कहा था, ‘मैं बीजेपी वालों से कहना चाहता हूं। क्या आपने एटम बम से बड़ा कुछ सुना है, वह है हाइड्रोजन बम। बीजेपी वाले तैयार हो जाओ, हाइड्रोजन बम आ रहा है। लोग जल्द ही वोट चोरी की सच्चाई जानने वाले हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘आने वाले समय में मैं आपको गारंटी देता हूं कि हाइड्रोजन बम (आने) के बाद नरेंद्र मोदी जी देश का सामना नहीं कर पाएंगे।’
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इससे पहले राहुल ने उस सबूत को ‘एटम बम’ बताया था, जिसे उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ उजागर किया था।
7 अगस्त को कांग्रेस-शासित कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने चुनाव आयोग पर बीजेपी के साथ सांठगांठ कर भारतीय लोकतंत्र को नष्ट करने और चुनाव चुराने का आरोप लगाया।
राहुल ने कहा कि कांग्रेस ने छह महीनों तक महादेवपुरा की मतदाता सूची का विश्लेषण किया और पाया कि 1,00,250 कथित फर्जी मतदाताओं में से 40,009 के पते फर्जी और अवैध थे और 10,452 थोक मतदाता थे जो एक ही पते पर पंजीकृत थे। उदाहरणों में 0 पते वाले प्रविष्टियां, अस्तित्वहीन स्थान और ऐसे पते शामिल थे जिनकी पुष्टि नहीं हो सकी।
राहुल ने चुनाव आयोग पर बीजेपी से मिलकर लोकतंत्र को खत्म करने और चुनाव चुराने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि आयोग 10-15 वर्षों का इलेक्ट्रॉनिक मतदाता डेटा और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराता है, तो वह “अपराध में सहभागी” है, क्योंकि ये अब अपराध के सबूत हैं। उन्होंने भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए न्यायपालिका से हस्तक्षेप की अपील की।
इस अध्ययन का हवाला देते हुए राहुल ने दावा किया कि बीजेपी ने बैंगलोर सेंट्रल सीट 32,707 वोटों से जीती, जबकि 1,00,250 फर्जी वोट उसके पक्ष में डाले गए। उन्होंने कहा कि ये फर्जी वोट पांच श्रेणियों में बंटे हुए थे: डुप्लिकेट वोटर (11,965), फर्जी/अवैध पते (40,009), एक ही पते पर थोक मतदाता (10,452), मतदाताओं की अवैध तस्वीरें (4,132), और पहली बार मतदाता बनने के लिए फॉर्म 6 का दुरुपयोग (33,692)।
फाइलें दिखाते हुए उन्होंने उदाहरण दिए कि लोग अलग-अलग बूथों पर कई बार वोट डाल रहे थे, जबकि मतदाता सूची में पते स्ट्रीट 0 और हाउस नं. 0 लिखे हुए थे। उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में एक ही पते पर 80 मतदाता और एक ही एक-बेडरूम वाले घर में 50 मतदाता दिखाए गए, और जब इनकी जांच की कोशिश हुई तो या तो शोधकर्ताओं को पीटा गया या यह पुष्टि हुई कि वहां मतदाता रहते ही नहीं।









