मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट के प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इसी को देखते हुए भारत सरकार ने प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर नई प्राथमिकता सूची जारी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि अगर गैस की उपलब्धता घटती है तो भी आम लोगों की जरूरतों पर असर नहीं पड़ने दिया जाएगा, जबकि कुछ औद्योगिक क्षेत्रों को सीमित गैस मिलेगी।
घरेलू और जरूरी सेवाओं को 100% गैस
सरकार ने साफ किया है कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े सेक्टरों को गैस की पूरी आपूर्ति दी जाएगी। इन क्षेत्रों में किसी तरह की कटौती नहीं होगी।
सबसे पहले घरों में पाइप से मिलने वाली पीएनजी गैस को प्राथमिकता दी गई है, ताकि लोगों को खाना बनाने में परेशानी न हो। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और निजी वाहनों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी की सप्लाई भी पूरी तरह सुरक्षित रखी गई है।
घरेलू रसोई गैस सिलेंडर बनाने के लिए जरूरी एलपीजी उत्पादन को भी 100 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही गैस ट्रांसपोर्ट करने वाली पाइपलाइनों को चलाने के लिए जो ईंधन चाहिए, उसे भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है। सरकार का मानना है कि इन सेवाओं में बाधा आने से सीधे आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हो सकती है।
उद्योगों को सीमित गैस मिलेगी
दूसरी ओर, औद्योगिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति पर कुछ कटौती की जाएगी। यह कटौती कंपनियों के पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर तय की गई है।
चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टरों को उनकी औसत खपत का लगभग 80 प्रतिशत गैस ही दी जाएगी। खाद बनाने वाली कंपनियों को करीब 70 प्रतिशत गैस मिलेगी, जबकि तेल रिफाइनरियों को 65 प्रतिशत आवंटन मिलेगा।
होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर कमर्शियल गैस की कमी बनी रही तो कई शहरों में कारोबार प्रभावित हो सकता है।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और इसका अधिकांश भाग मध्य-पूर्व से होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है। क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
इसी वजह से सरकार ने गैस के इस्तेमाल को संतुलित करने के लिए यह प्राथमिकता व्यवस्था लागू की है। घरेलू एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गैस सिलेंडर की बुकिंग के बीच का अंतर भी बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है ताकि भंडार पर दबाव कम हो सके।
फिलहाल 40 दिन का स्टॉक
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में फिलहाल करीब 40 दिनों के लिए एलपीजी का भंडार मौजूद है। इसके साथ ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से वैकल्पिक आयात बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
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सरकार का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। यदि संकट लंबा चलता है तो उद्योगों में उत्पादन प्रभावित हो सकता है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को गैस की कमी से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।








