मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती का ऐलान किया है।
पेट्रोल-डीजल पर टैक्स में भारी कमी
सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है। वहीं डीजल पर यह शुल्क 10 रुपये से घटाकर पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
यह कदम बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के प्रभाव को कम करने और आम लोगों पर बोझ घटाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वैश्विक संकट का असर
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। खासतौर पर होर्मुज जलमार्ग पर दबाव के कारण कच्चे तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आई है।
यह मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, जहां से रोजाना बड़ी मात्रा में तेल और गैस का परिवहन होता है।
ATF पर नया टैक्स, हवाई यात्रा महंगी होने के संकेत
सरकार ने पहली बार एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है। हालांकि राहत के बाद इसकी प्रभावी दर घटाकर 29.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है।
इस फैसले से एयरलाइंस कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले समय में हवाई टिकट की कीमतों पर पड़ सकता है।
घरेलू तेल कंपनियों को राहत
सरकार ने निर्यात से जुड़े कई शुल्कों में छूट दी है और पहले लागू विंडफॉल टैक्स को भी समाप्त कर दिया है। इससे घरेलू तेल कंपनियों को वित्तीय राहत मिलने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल और डीजल के टैक्स ढांचे में बदलाव कर कंपनियों के घाटे को संतुलित करने की कोशिश की गई है।
क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?
हालांकि टैक्स में कटौती के बावजूद आम जनता को तुरंत राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाना है।
तेल कंपनियां फिलहाल हर लीटर पेट्रोल और डीजल पर भारी नुकसान झेल रही हैं। ऐसे में सरकार द्वारा दी गई राहत का बड़ा हिस्सा कंपनियों के घाटे को कम करने में इस्तेमाल होगा।
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सरकार का यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। हालांकि इससे तेल कंपनियों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन आम उपभोक्ताओं को तुरंत कीमतों में बड़ी कमी देखने को नहीं मिल सकती। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय हालात पर ही ईंधन कीमतों की दिशा निर्भर करेगी।









