मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। इस बीच भारत में लॉकडाउन की चर्चाओं ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन केंद्र सरकार ने इन अफवाहों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में भारी उछाल
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जानकारी दी कि पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर से अधिक हो गई हैं। इसका असर दुनिया भर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है।
दक्षिण-पूर्व एशिया, यूरोप, अफ्रीका और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्रों में ईंधन की कीमतों में 20% से 50% तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
भारत सरकार ने जनता को राहत देने का फैसला किया
मंत्री ने बताया कि सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर आम नागरिकों को राहत देने के लिए वित्तीय बोझ खुद उठाया जाए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और जनता को राहत देने के लिए अपने राजस्व में कटौती की।
तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के प्रयास
तेल कंपनियों को हो रहे नुकसान को कम करने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर नुकसान को संतुलित करने के लिए निर्यात पर टैक्स लगाया गया है। इससे घरेलू बाजार में आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
सप्लाई और ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार की नजर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन, ऊर्जा और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है। वैश्विक अस्थिरता के बावजूद सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
लॉकडाउन को लेकर फैलाई जा रही खबरें गलत
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंत्री ने लॉकडाउन की सभी खबरों को अफवाह बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और देश में लॉकडाउन लगाने की कोई योजना नहीं चल रही है।
जिम्मेदारी और सतर्कता की अपील
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें। पहले भी भारत ने वैश्विक संकटों का मजबूती से सामना किया है और इस बार भी हालात नियंत्रण में हैं।
यह भी पढ़ें: नया Income-tax Act एक अप्रैल से होगा लागू, जानें क्या बदलेगा?
तेल संकट के कारण वैश्विक स्तर पर अस्थिरता जरूर बढ़ी है, लेकिन भारत में लॉकडाउन की संभावना को लेकर कोई ठोस आधार नहीं है। सरकार हालात पर नजर रखते हुए आवश्यक कदम उठा रही है, जिससे आम जनता पर कम से कम असर पड़े।









